बिलासपुर दिलीप तोलान

बिलासपुर/ तखतपुर… (दिलीप तोलानी)..सोमवार की सुबह बांधा के जोगीपुर जंगल में अचानक चीख-पुकार मच गई। रोजमर्रा की जरूरत के लिए बांस की करील और पिहरी लेने जंगल पहुंचे ग्रामीणों के सामने अचानक बाघिन आ गई। बाघिन को देखते ही ग्रामीण जान बचाकर भागे, लेकिन 22 वर्षीय धर्मजीत लहरे पिता राजेंद्र लहरे पीछे रह गया। बाघिन ने उसे दबोच लिया। हमले में धर्मजीत की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर गांव पहुंचते ही बांधा और आसपास के इलाके में दहशत फैल गई।

सोमवार सुबह करीब आठ बजे ग्रामीण जोगीपुर बीट के पहाड़ी जंगल क्षेत्र में पहुंचे थे। इसी दौरान बाघिन की मौजूदगी का पता चला। अचानक सामने आए खतरे से ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। सभी अपनी जान बचाने के लिए जंगल से बाहर भागने लगे। इसी दौरान धर्मजीत पीछे छूट गया और बाघिन ने उसे अपना शिकार बना लिया।

ये खबर भी पढ़ें…
20 अगस्त को फैसला, 22 को नियुक्ति आदेश; 111 युवा इंजीनियरों को मिली सरकारी नौकरी
20 अगस्त को फैसला, 22 को नियुक्ति आदेश; 111 युवा इंजीनियरों को मिली सरकारी नौकरी
बिलासपुर... लंबे इंतजार के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 111 युवा इंजीनियरों के लिए नौकरी का रास्ता साफ हो गया।...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

ग्रामीणों के गांव लौटने और घटना की जानकारी देने के बाद बड़ी संख्या में लोग जंगल की ओर पहुंचे। तलाश के दौरान धर्मजीत का शव जंगल में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम भी सक्रिय हुई। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की।

एक झटके में बुझ गया घर का चिराग

ये खबर भी पढ़ें…
नए सपनों के साथ कॉलेज पहुंचीं बेटियां, सीनियर्स ने प्यार से सजाया स्वागत का मंच
नए सपनों के साथ कॉलेज पहुंचीं बेटियां, सीनियर्स ने प्यार से सजाया स्वागत का मंच
अंबिकापुर...( पृथ्वी लाल केशरी )होली क्रॉस वीमेंस कॉलेज में नए शैक्षणिक सफर की शुरुआत करने वाली छात्राओं के लिए सीनियर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

धर्मजीत के साथ जंगल गए ग्रामीणों ने जब घटना की जानकारी गांव में दी तो बांधा में मातम पसर गया। जिस युवक के घर से वह जंगल जाने के लिए निकला था, वहां कुछ ही देर बाद उसकी मौत की खबर पहुंची। हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया।

घटना के बाद ग्रामीणों में सबसे ज्यादा डर इस बात को लेकर है कि बाघिन अभी क्षेत्र से दूर नहीं गई है। ग्रामीणों के मुताबिक बाघिन के साथ उसके तीन शावक भी देखे गए हैं। ऐसे में जंगल के भीतर जाना अब किसी बड़े खतरे को न्योता देने से कम नहीं है।

ये खबर भी पढ़ें…
आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी मेगा हेल्थ चेक अप कैम्प का महाकुंभ आरंभ 
आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी मेगा हेल्थ चेक अप कैम्प का महाकुंभ आरंभ 
बिलासपुर। गुरुद्वारा श्री गुरूसिंघ दयालबंद बिलासपुर एवम आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी एंड रिसर्च सेंटर कोटा राजस्थान के सहयोग से श्री गुरु हरिकिशन...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 तीन शावकों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता

घटना के बाद सामने आए वीडियो और ग्रामीणों की जानकारी के अनुसार बाघिन पहाड़ी इलाके में अपने तीन शावकों के साथ घूम रही है। ग्रामीणों ने बाघिन के आसपास पहुंचने और उसे भगाने की कोशिश में पथराव किए जाने की बात भी कही है।

यदि ऐसी स्थिति बनी है तो खतरा दोतरफा है। बाघिन और उसके शावकों के करीब जाने से ग्रामीणों की जान खतरे में है, वहीं मानवीय हस्तक्षेप से वन्यजीव भी आक्रामक हो सकते हैं।

वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने की हिदायत दी है और प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की बात सामने आई है।

 मौजूदगी की चर्चा, फिर जंगल में पहुंचते रहे लोग

ग्रामीणों का दावा है कि बाघिन पिछले करीब एक महीने से पहाड़ी इलाके में बने गुफानुमा स्थान के आसपास दिखाई दे रही थी। यदि ग्रामीणों की यह जानकारी सही है तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि इतने संवेदनशील इलाके में वन विभाग की निगरानी कितनी प्रभावी थी।

बाघिन की मौजूदगी की जानकारी के बावजूद ग्रामीण जंगल में करील और पिहरी लेने पहुंचते रहे। जंगल में बांस और लकड़ी कटाई जैसी गतिविधियों को लेकर भी ग्रामीण आरोप लगाते रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन धर्मजीत की मौत के बाद इनकी जांच की जरूरत जरूर बढ़ गई है।

वन विभाग की भूमिका पर सवाल

धर्मजीत की मौत के बाद वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बाघिन को ट्रैक करना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उसके संभावित इलाके से दूर रखना भी है।

क्या विभाग को बाघिन की मौजूदगी की पहले से जानकारी थी? अगर थी तो संवेदनशील क्षेत्र में ग्रामीणों की आवाजाही क्यों नहीं रोकी गई? जंगल में कथित कटाई और अन्य गतिविधियों पर निगरानी कितनी प्रभावी थी? क्या बाघिन और उसके शावकों के संभावित ठिकाने को चिन्हित किया गया था? इन सवालों का जवाब अब इसलिए जरूरी है क्योंकि एक जान जा चुकी है और खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।

मुनादी के साथ जमीन पर भी चाहिए सख्ती

घटना के बाद वन विभाग ने गश्त बढ़ाई है और ग्रामीणों को जंगल में नहीं जाने की चेतावनी दी है। लेकिन जोगीपुर के हालात को देखते हुए केवल मुनादी पर्याप्त नहीं होगी। संवेदनशील क्षेत्र में लगातार निगरानी, ग्रामीणों की आवाजाही पर प्रभावी रोक और बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।

इसके साथ ही जंगल में अवैध कटाई या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही मिलते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है।

धर्मजीत की मौत ने छोड़ दिया बड़ा सवाल

जोगीपुर जंगल में हुई यह घटना बांधा के ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक हादसा नहीं है। यह उस खतरे की चेतावनी भी है, जिसमें जंगल और इंसान लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।

धर्मजीत जंगल गया था करील और पिहरी लेने

अब जरूरत इस बात की है कि उसकी मौत के बाद विभाग पूरी तरह सतर्क हो और जोगीपुर के जंगल को लेकर ऐसी व्यवस्था बनाए कि एक परिवार का चिराग बुझने के बाद किसी दूसरे घर में मातम न पहुंचे।