CG Bilaspur High Court /बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पिता की मृत्यु के बाद नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले बेटे का दावा केवल दूसरे भाई की आपत्ति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। सक्षम प्राधिकारी को लागू नियमों और अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत सभी संबंधित दावेदारों की पात्रता की जांच कर कारण सहित निर्णय लेना होगा।

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने भिलाई-चरोदा नगर निगम के 15 अप्रैल 2025 के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने निगम को दोनों भाइयों को अपना पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर देते हुए आठ सप्ताह के भीतर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पुराने आदेश के निरस्त होने से याचिकाकर्ता को स्वतः अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।

पिता की मृत्यु के बाद दोनों भाइयों ने किया दावा

मामला दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित साउथ वसुंधरा नगर निवासी खिलेश्वर प्रसाद से जुड़ा है। उनके पिता परस राम नगर निगम में सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। 29 सितंबर 2023 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया।

पिता की मृत्यु के बाद खिलेश्वर ने 4 दिसंबर 2023 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इसके बाद उनके भाई दुमेश कुमार टंडन ने 15 जुलाई 2024 को आवेदन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्वयं भी अनुकंपा नियुक्ति का दावा पेश किया। दोनों भाइयों के बीच दावे को लेकर विवाद की स्थिति बनी। इसी बीच नगर निगम ने 15 अप्रैल 2025 को खिलेश्वर के आवेदन को खारिज कर दिया। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

भाई की आपत्ति से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि दूसरे भाई की आपत्ति मात्र के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करने की जिम्मेदारी से नगर निगम मुक्त नहीं हो सकता। वहीं, नगर निगम और आपत्तिकर्ता भाई की ओर से परिवार में विवाद, सहमति और लागू नियमों से जुड़ी शर्तों का हवाला दिया गया। दुमेश कुमार ने स्वयं को बेरोजगार और दिवंगत कर्मचारी पर आश्रित बताते हुए अपना दावा रखा।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य और लागू नीति के अनुसार दावेदारों की पात्रता की जांच करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अनुकंपा नियुक्ति विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु से परिवार पर आने वाली आर्थिक कठिनाइयों को कम करना है। इसलिए नियुक्ति का निर्णय संबंधित नियमों और नीति के अनुरूप होना चाहिए।

कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को यह जांचने का निर्देश दिया कि दूसरे भाई ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए अलग से आवेदन प्रस्तुत किया है या नहीं और लागू नीति में दावेदारों के बीच किसी तरह की प्राथमिकता निर्धारित है या नहीं।

अदालत ने विधवा की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को दिए गए सहमति संबंधी शपथपत्र पर भी विचार करने को कहा। साथ ही स्पष्ट किया कि इस सहमति के आधार पर दूसरे पात्र दावेदार का दावा अपने आप समाप्त नहीं माना जा सकता।

आठ सप्ताह में कारण सहित निर्णय लेने का निर्देश

हाई कोर्ट ने भिलाई-चरोदा नगर निगम के 15 अप्रैल 2025 के आदेश को निरस्त करते हुए दोनों भाइयों को अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज पेश करने का अवसर देने को कहा है। निगम को सभी तथ्यों, लागू नियमों और अनुकंपा नियुक्ति नीति पर विचार कर आठ सप्ताह के भीतर कारण सहित नया निर्णय लेना होगा।