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Bilaspur

सीबीएसई का नाम, बिना मान्यता का काम: ‘स्कूल साम्राज्य’ पर DEO की जांच—बिरला ओपन स्कूल घेरे में

ट्रस्ट मेडिकल, काम स्कूल: बिलासपुर में शिक्षा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

बिलासपुर…“जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ…”—बिलासपुर की निजी स्कूल व्यवस्था पर यह पंक्ति अब सिर्फ प्रतीक नहीं, हकीकत बनती दिख रही है। जिले में लंबे समय से ऐसे निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जो या तो बिना वैध सीबीएसई मान्यता के चल रहे हैं या फिर सीमित अनुमति के बावजूद ऊंची कक्षाओं तक पढ़ाई कर रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य में अब एक नाम तेजी से उभरकर सामने आया है—बिरला ओपन इंटरनेशनल स्कूल—जहां कागजों में दर्ज दावों और जमीन पर चल रही गतिविधियों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

मान्यता सीमित, संचालन विस्तृत: खुल  परतें

जिला स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड संकेत देते हैं कि संबंधित संस्थान को कक्षा 1 से 8 तक अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने की अनुमति मिली। लेकिन मौके पर नर्सरी से लेकर 12वीं तक कक्षाएं संचालित हो रही हैं। यानी अनुमति का दायरा सीमित, लेकिन संचालन का विस्तार उससे कहीं आगे। सीबीएसई पैटर्न के नाम पर सीनियर सेकेंडरी स्तर तक पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि यह स्पष्ट नहीं कि उस स्तर की संबद्धता किस प्रक्रिया से और किन शर्तों पर हासिल की गई।

ट्रस्ट का उद्देश्य और स्कूल संचालन: विरोधाभास

इस पूरे प्रकरण का सबसे अहम पहलू वह ट्रस्ट है, जिसके माध्यम से स्कूल संचालित हो रहा है। उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि ट्रस्ट का पंजीयन चिकित्सा सेवाओं—दंत चिकित्सा महाविद्यालय, फिजियोथेरेपी और पैरामेडिकल कोर्स—के लिए किया गया। आम जनता को चिकित्सा सहायता देना इसका घोषित उद्देश्य है। प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार का उल्लेख इसमें नहीं है। इसके बावजूद उसी ट्रस्ट के नाम पर नर्सरी से 12वीं तक स्कूल संचालन, यह संकेत देता है कि उद्देश्य और वास्तविक गतिविधियों के बीच गंभीर अंतर मौजूद है।

मोंपका और व्यापार विहार: 2 लोकेशन,1 ढांचा

जमीन पर संचालन की तस्वीर और भी पेचीदा नजर आती है। मोंपका क्षेत्र में कक्षा नर्सरी से 12वीं तक पढ़ाई कराए जाने की जानकारी है, जबकि व्यापार विहार स्थित एक कॉर्पोरेट भवन से प्रबंधन और संचालन जुड़ा बताया जाता है। इसी के साथ व्यापार विहार में कक्षा 1 से 5 तक अलग से गतिविधियां संचालित होने की बात भी सामने आई है। एक ही संस्थान का इस तरह दो स्थानों से संचालन, नियमों और मान्यता की शर्तों पर सीधे सवाल खड़े करता है।

सीबीएसई पैटर्न बनाम राज्य की अनुमति

स्कूल में पढ़ाई सीबीएसई पैटर्न के अनुसार कराई जा रही है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताबों का उपयोग नहीं किया जा रहा, जबकि राज्य से मिली अनुमति उसी ढांचे के अनुरूप मानी जाती है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि बिना पूर्ण सीबीएसई संबद्धता के इस तरह सीनियर सेकेंडरी स्तर तक पढ़ाई कराना किस आधार पर संभव हो रहा है। कागजों में कुछ और, कक्षाओं में कुछ और—यह अंतर अब खुलकर सामने आ रहा है।

 शिक्षा के नाम पर संरचित मॉडल?

इस स्कूल के संचालन को लेकर यह तथ्य भी सामने आता है कि इसका प्रबंधन एक कोयला कारोबारी परिवार से जुड़ा हुआ है। व्यापार विहार के कॉर्पोरेट सेटअप से संचालन और बड़े स्तर पर विस्तार, इसे एक सामान्य शैक्षणिक संस्था से अलग बनाता है। आरोप यह भी हैं कि यह ढांचा वित्तीय प्रबंधन या टैक्स प्लानिंग के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। हालांकि इन पहलुओं की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही संभव होगी, लेकिन प्रारंभिक संकेत पूरे मामले को और गंभीर बनाते हैं।

 स्कूलों पर सख्ती, कुछ पर चुप्पी

हाल के दिनों में जिला प्रशासन के निर्देश पर निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए। ब्रिलिएंट और सेंट जेवियर जैसे स्कूलों पर कार्रवाई की चर्चा सामने आई। लेकिन उसी दायरे में आने वाले बिरला ओपन इंटरनेशनल स्कूल पर अब तक स्पष्ट और ठोस कार्रवाई का अभाव, विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। क्या यह महज संयोग है या प्रभाव और पहुंच के आधार पर कार्रवाई की दिशा तय हो रही है—यह सवाल बना हुआ है।

संयुक्त संचालक, विभाग की भूमिका पर प्रश्न

व्यापार विहार क्षेत्र, जहां यह पूरा संचालन केंद्रित है, वही संयुक्त संचालक कार्यालय का दायरा भी है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर गतिविधियों का लंबे समय तक बिना हस्तक्षेप जारी रहना विभागीय निगरानी की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। “जानकारी नहीं” का तर्क अब जमीन पर दिख रही स्थिति के साथ मेल नहीं खाता।

छात्रों का भविष्य: सबसे बड़ा दांव

पूरे प्रकरण में सबसे संवेदनशील पहलू उन छात्रों का है, जो इन संस्थानों में पढ़ रहे हैं। कक्षा 10वीं और 12वीं तक पढ़ाई कराए जाने के बावजूद यदि मान्यता और संबद्धता स्पष्ट नहीं है, तो प्रमाणपत्र, परीक्षा और आगे की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। अभिभावक फीस दे रहे हैं, लेकिन बदले में मिलने वाली वैधता पर संदेह गहराता जा रहा है।

आधिकारिक पक्ष: जांच की तैयारी

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने स्वीकार किया कि बिरला ओपन इंटरनेशनल स्कूल से जुड़ी शिकायतें विभाग के संज्ञान में आई हैं और कई प्रकार की कमियां सामने आई हैं। उनके अनुसार जल्द ही एक जांच टीम का गठन किया जाएगा, जो पूरे प्रकरण की विस्तृत पड़ताल करेगी। जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग इस मामले में औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

एक स्कूल से उठता सवाल, पूरे सिस्टम पर असर

बिरला ओपन इंटरनेशनल स्कूल का मामला अब किसी एक संस्थान की सीमा से बाहर निकल चुका है। यह उस व्यापक व्यवस्था को उजागर करता है, जहां नियम और उनका पालन दो अलग दिशाओं में चलते नजर आते हैं। कागजों में वैधता और जमीन पर संचालन के बीच की खाई अब साफ दिखाई दे रही है।

आगे क्या

दस्तावेजों, ट्रस्ट के उद्देश्य, मान्यता की सीमा और सीबीएसई पैटर्न के उपयोग के बीच मौजूद विरोधाभास यह संकेत दे रहे हैं कि मामला अभी और गहराएगा। जांच की दिशा और निष्कर्ष तय करेंगे कि यह सिर्फ अनियमितता है या एक संगठित पैटर्न। फिलहाल इतना तय है—यह खबर एक स्कूल की नहीं, बिलासपुर की पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ी हुई है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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