भोपाल । लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संरक्षक रघु ठाकुरने कहा है कि  बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री खालिद जिया के बेटे बंगाल नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 वर्ष बाद बांग्लादेश लौटे हैं । उन्होंने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए बांग्लादेश सरकार के नियंत्रक मोहम्मद युनिस को अपनी सुरक्षित वापसी के लिए धन्यवाद दिया। अब जब वे वापिस आए हैं तो श्रीमती शेख हसीना देश के बाहर शरणार्थी बनकर रहने को लाचार है। आखिर यह हिंसा प्रतिहिंसा की राजनीति कब तक चलती रहेगी और बंगला देश को हिंसा तथा विदेशी शक्तियों का खिलौना बनने को विवश करती रहेगी।
उन्होने आगे कहा कि  बांग्लादेश के अवाम को विचार करना चाहिए कि उनके देश राजनीति में इतनी कटुता क्यों है, कि जो सत्ता में आता है वह प्रतिपक्ष को शत्रु मानता है उसकी जान लेने का प्रयास करता है और प्रतिपक्ष को खत्म करने के प्रयास करता है। जब प्रतिपक्ष सत्ता में आता है तो वही चलन प्रतिपक्ष द्वारा अपनाया जाता है । कुल मिलाकर हिंसा बनाम हिंसा का दौर चलतारहता है।
बांग्लादेश तो एक ही मजहब का देश है । सत्ताधीश और प्रतिपक्ष दोनों एक ही मजहब के हैं । मजहब का देश बनाने वालों को भी समझ लेना चाहिए कि एक धर्म का देश बनने से एकता नहीं होती ।‌ बल्कि अंतर धार्मिक टकराव ज्यादा होते हैं। श्री तारिक रहमान अभी आयु के मध्यम वर्ग में हैं और उन्हें अब बांग्लादेश की राजनीति से हिंसा को समाप्त करने की नई शुरुआत करनी चाहिए ।आज उन्हें इतिहास याद करना चाहिये कि महात्मा गांधी ने 1947 में कितना बड़ा काम किया था की जलते बंगाल को शांत कर दिया था ।
रघु ठाकुर ने एक बयान में कहा है कि बांग्लादेश को महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानकर हिंसा को छोड़कर, संवैधानिक व्यवस्था को चलाना चाहिए। यही उनके और बांग्ला देश के लिए हितकर होगा।