मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर सुलग रहा असंतोष अब पूरी तरह से ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही पार्टी कार्यकर्ताओं की दबी-छिपी नाराजगी शनिवार को सरेआम खुलकर सामने आ गई।

खोंगापानी के सांस्कृतिक भवन में आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मरण पखवाड़ा कार्यक्रम के दौरान भाजपा के भीतर की गुटबाजी और तीखा आक्रोश सार्वजनिक रूप से देखने को मिला, जहाँ कार्यक्रम स्थल के बाहर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए समर्पित भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ जमकर मोर्चा खोल दिया और नारेबाजी की।

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यह हाई-वोल्टेज ड्रामा उस समय हुआ जब सांस्कृतिक भवन के अंदर भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शताब्दी पांडे और भाजपा जिलाध्यक्ष चंपा देवी पावले पार्टी के मुख्य सांगठनिक कार्यक्रम में मंचासीन थीं।

ठीक उसी समय, भवन के बाहर भाजपा हसदेव मंडल के सैकड़ों आक्रोशित कार्यकर्ता हाथों में बैनर-तख्ती लिए ‘तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ और ‘जिलाध्यक्ष होश में आओ’ जैसे तीखे नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

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प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप था कि एल्डरमैन की महत्वपूर्ण नियुक्तियों में पार्टी के लिए लाठियां खाने वाले, समर्पित और वर्षों से दरी बिछा रहे पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा की गई है। इसके विपरीत, कांग्रेस छोड़कर हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले ‘अवसरवादियों’ को मलाईदार पदों पर प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही, कुछ पुराने चेहरों को ही दोबारा एल्डरमैन बनाए जाने पर भी कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए।

इस बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष धीरेंद्र विश्वकर्मा और भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष विनोद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ नेताओं ने दो टूक कहा कि पार्टी को खून-पसीने से सींचने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे पूरे संगठन में निराशा और भारी असंतोष बढ़ता जा रहा है।

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उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इसी तरह समर्पित कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई और उन्हें नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले समय में संगठन को इसका बड़ा नकारात्मक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

पूर्व मंडल अध्यक्ष विनोद गुप्ता ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा, “भाजपा को इस मुकाम तक लाने और मजबूत बनाने में जिन्होंने वर्षों तक रात-दिन मेहनत की है, उन पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान और अवसर मिलने चाहिए। बेहद अफसोस की बात है कि पार्टी में हाल ही में कांग्रेस से आए दलबदलू लोगों को ज्यादा महत्व और पद दिए जा रहे हैं, जबकि हमारी वफादारी को दरकिनार किया जा रहा है।”

दूसरी तरफ, अंदरूनी कलह और कार्यकर्ताओं की इस भारी नाराजगी पर भाजपा जिलाध्यक्ष चंपा देवी पावले ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने मीडिया के सामने इस पूरे विरोध प्रदर्शन को सीधे तौर पर विपक्ष की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया।

जिलाध्यक्ष पावले ने अपना बचाव करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक चुनाव या शासकीय नियुक्ति प्रक्रिया में दावेदारों की संख्या हमेशा बहुत ज्यादा होती है, लेकिन पद और जिम्मेदारी किसी एक योग्य व्यक्ति को ही दी जा सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने सभी स्थानीय और राजनैतिक पहलुओं पर बारीकी से विचार करने के बाद ही एल्डरमैन की इन नियुक्तियों को अंतिम रूप दिया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि भाजपा एक अनुशासित राजनीतिक परिवार है और यहाँ हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता का पूरा सम्मान किया जाता है।

संगठन के भीतर किसी भी प्रकार का कोई मतभेद नहीं है; कुछ बाहरी और असंतुष्ट लोग जानबूझकर पार्टी का माहौल खराब करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, पार्टी के इस आंतरिक कलह के सड़क पर आने के बाद क्षेत्र की सियासत पूरी तरह गर्मागई है।