Jaya Ekadashi Kab Hai 2026-जया एकादशी 2026, पिशाच योनि से मुक्ति दिलाता है यह व्रत, 29 जनवरी को बन रहे हैं दुर्लभ संयोग.. नोट कर लें शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:25 से 06:18 तक रहेगा, जबकि दोपहर में सबसे उत्तम माना जाने वाला 'अभिजित मुहूर्त' 12:13 से 12:56 तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, सुबह 07:11 से 07:31 तक 'रवि योग' का विशेष संयोग रहेगा, जिसमें की गई साधना और दान-पुण्य का दोगुना फल प्राप्त होता है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 05:55 से 06:22 तक रहेगा, जो दीपदान और संध्या वंदन के लिए श्रेष्ठ समय है।

Jaya Ekadashi Kab Hai 2026/सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, जिनमें माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे ‘जया एकादशी’ या ‘भौमि एकादशी’ के नाम से जाना जाता है, अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस वर्ष जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करता है, उसे मृत्यु के पश्चात भूत, प्रेत या पिशाच योनि में भटकना नहीं पड़ता। शास्त्रों में उल्लेख है कि यह व्रत न केवल व्यक्ति के भीतर छिपे दोषों को समाप्त कर उसे सद्गुणों की ओर ले जाता है, बल्कि ब्रह्महत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति दिलाकर सीधे बैकुंठ धाम का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस वर्ष जया एकादशी पर इंद्र और रवि योग जैसे कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन की महिमा और भी बढ़ गई है।Jaya Ekadashi Kab Hai 2026
पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को शाम 04 बजकर 34 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 56 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यताओं के आधार पर जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन पूजा-अर्चना के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:25 से 06:18 तक रहेगा, जबकि दोपहर में सबसे उत्तम माना जाने वाला ‘अभिजित मुहूर्त’ 12:13 से 12:56 तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, सुबह 07:11 से 07:31 तक ‘रवि योग’ का विशेष संयोग रहेगा, जिसमें की गई साधना और दान-पुण्य का दोगुना फल प्राप्त होता है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 05:55 से 06:22 तक रहेगा, जो दीपदान और संध्या वंदन के लिए श्रेष्ठ समय है।
जया एकादशी के महत्व को स्पष्ट करते हुए ज्योतिषविदों का कहना है कि इस दिन इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास और शिववास योग का एक साथ होना बेहद शुभ है।
मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से न केवल साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि उसके पूर्वजों को भी स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करता है। इस दिन भगवान विष्णु की पीले फूलों, अक्षत और तुलसी दल से पूजा करने का विधान है।Jaya Ekadashi Kab Hai 2026




