बिलासपुर…साइबर ठगी अब केवल अनजान लिंक या फर्जी कॉल तक सीमित नहीं रह गई है। ठग पहले सामने वाले का भरोसा जीतते हैं, उसकी कमजोरियां पहचानते हैं और फिर डर, लालच या दबाव के जरिए उसी से रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। साइबर अपराध के इसी बदलते तौर-तरीके को समझाने के लिए बिलासपुर पुलिस ने मंगलवार को शहर से लेकर गांव तक जागरूकता अभियान चलाया। बिलासपुर में जहां लाल बहादुर शास्त्री सभागार में ‘साइबर संवाद’ के जरिए पीड़ितों की आपबीती और पुलिस की पड़ताल आमने-सामने आई, वहीं रतनपुर के ग्राम चपोरा में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों को ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीके बताए गए।

बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह की पहल पर आयोजित ‘साइबर संवाद’ में साइबर अपराध की कार्यप्रणाली से लेकर पीड़ितों के अनुभव तक पर खुलकर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सवाल पूछने और अपनी शंकाओं का समाधान हासिल करने का अवसर भी मिला।

आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि साइबर अपराधी बातचीत के दौरान सामने वाले की परिस्थितियों और कमजोरियों को समझते हैं और फिर उसी आधार पर अपना जाल बिछाते हैं। वहीं एसएसपी रजनेश सिंह ने साइबर ठगी के मनोवैज्ञानिक पहलू को समझाते हुए बताया कि किस तरह ठग फोन पर व्यक्ति को विश्वास में लेकर या भय का माहौल बनाकर उससे खुद रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। उन्होंने संदिग्ध कॉल, लिंक और संदेशों पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले सत्यापन करने की जरूरत बताई।

17 दिन डिजिटल अरेस्ट, पीड़ित ने सुनाई कहानी

‘साइबर संवाद’ की सबसे अहम कड़ी वे लोग रहे, जो खुद साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं। कार्यक्रम में ऐसे पीड़ितों को बुलाया गया, जिनकी शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई के बाद ठगी की रकम वापस हासिल करने में मदद मिली।

एक पीड़ित ने बताया कि साइबर ठगों ने उसे करीब 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। भय और लगातार दबाव के बीच ठगों ने उसे अपने प्रभाव में ले लिया। पीड़ित ने पूरी घटना साझा करते हुए बताया कि किस तरह वह साइबर अपराधियों के जाल में फंसा और बाद में पुलिस की मदद से उससे बाहर निकल सका। सरकंडा पुलिस की कार्रवाई और सहायता का भी इस दौरान उल्लेख किया गया।

अन्य पीड़ितों ने भी ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी कॉल के जरिए हुई ठगी की घटनाएं साझा कीं। इन घटनाओं ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को यह समझने का मौका दिया कि साइबर ठग किस तरह अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बनाते हैं।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी चर्चा में

कार्यक्रम में साइबर बुलीइंग और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। व्यापारी संघ के एक सदस्य ने बच्चों और बच्चियों को साइबर बुलीइंग से बचाने से संबंधित सवाल पुलिस अधिकारियों के सामने रखे। अधिकारियों ने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सजग नजर रखने और उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई।

मीडियाकर्मियों ने भी साइबर अपराध की मौजूदा परिस्थितियों और उससे जुड़े सवाल अधिकारियों के सामने रखे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में आईजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने मीडिया के सवालों के जवाब दिए। कार्यक्रम का सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया।

शहर के मंच से गांव की चौपाल तक अभियान

साइबर जागृति अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव रतनपुर का ग्राम चपोरा रहा। यहां रतनपुर पुलिस ने जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों को साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी। थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को समझाया कि अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाता नंबर और सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

ग्रामीणों को फर्जी लोन, लॉटरी, केबीसी और नौकरी के नाम पर आने वाले झांसे से सावधान रहने तथा व्हाट्सऐप और फेसबुक पर मिले अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी गई। पुलिस ने साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करने की जानकारी भी दी।

जनचौपाल में ग्राम सरपंच, पंचगण के साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण शामिल हुए। इस तरह बिलासपुर में पुलिस अधिकारियों, पीड़ितों, मीडिया, बैंकिंग क्षेत्र, व्यापारियों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद हुआ तो रतनपुर में वही अभियान सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंचा।

समय पर शिकायत..रकम बचने का रास्ता

एसएसपी रजनेश सिंह ने नागरिकों से साइबर ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की अपील की। उन्होंने बताया कि ठगी की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, रकम को होल्ड या रिकवर कराने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। पुलिस का जोर केवल घटना के बाद कार्रवाई पर नहीं, बल्कि ठगी से पहले लोगों को उसके तरीके समझाने पर भी रहा।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर पंकज पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामकुमार करियारे, नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन परमेश्वर तिलकवार, रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, थाना प्रभारी कोतवाली देवेश सिंह, निरीक्षक गोपाल सतपति सहित पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। शहर के मीडिया प्रतिनिधियों, बैंक अधिकारियों, व्यापारी संघ, सामाजिक संगठनों, एनजीओ, चेतना ग्रुप, ‘आओ संवारें कल अपना’ ग्रुप, खेल जगत से जुड़े लोगों और लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय के छात्र-छात्राओं व शिक्षकों ने भी सहभागिता की।