एक महीने से दबा अनुकंपा नियुक्ति का मामला फूटा: रिसीविंग दिखाते ही हरकत में विभाग, जांच का आश्वासन
जांच नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाएंगे – अंकित गौरहा; युक्तियुक्तिकरण में भी बड़े भ्रष्टाचार का आरोप

बिलासपुर..जिला शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति में कथित फर्जीवाड़े का मामला अब खुलकर सामने आ गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग आरपी आदित्य से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मामले को दबाने या जांच में देरी की कोशिश हुई तो वह सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
एक महीने से लंबित शिकायत, कार्रवाई शून्य
अंकित गौरहा ने बताया कि लगभग एक माह पहले उन्होंने संभागायुक्त और संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत देकर अनुकंपा नियुक्ति में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की थी।
इसके बावजूद एक महीने तक न तो किसी प्रकार की जांच शुरू हुई और न ही शिकायत पर कोई जवाब मिला। गौरहा ने कहा कि संभागायुक्त कार्यालय से जानकारी मिली कि शिकायत संयुक्त संचालक कार्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद मामले को संज्ञान में नहीं लिया गया।
रिसीविंग पत्र पेश होते ही हरकत
संयुक्त संचालक से मुलाकात के दौरान अंकित गौरहा ने संभागायुक्त कार्यालय और संयुक्त संचालक कार्यालय से प्राप्त शिकायत की रिसीविंग कॉपी भी पेश की।
इसके बाद संयुक्त संचालक ने तत्काल दोनों पत्र मंगवाए और मामले की समीक्षा शुरू करने की बात कही।
पहले उन्होंने कहा कि संभव है शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई हो, लेकिन कुछ देर बाद यह जानकारी दी कि शिकायत पत्र मिल गया है और अब पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
जल्द बनेगी जांच टीम
संयुक्त संचालक आरपी आदित्य ने आश्वासन दिया कि प्रकरण गंभीर है और इसकी जांच के लिए जल्द ही एक टीम गठित की जाएगी। उन्होंने यह भी माना कि जिस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी पर आरोप लगे हों, उसकी जांच ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से कराना तकनीकी रूप से उचित नहीं है।
अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप
अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा विभाग में एक दर्जन से अधिक अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। पात्र आवेदकों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को नौकरी देने और इसके पीछे कथित तौर पर भारी लेन-देन होने की बात सामने आ रही है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने भी कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए थे। कलेक्टर के आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच का आदेश दिया, लेकिन उस जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
डीईओ की जांच बीईओ से कराना गलत
गौरहा ने कहा कि जिस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और विभाग के बाबू पर आरोप लगे हैं, उसकी जांच बीईओ से कराना तकनीकी रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि एक बीईओ किसी बाबू की जांच कर सकता है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की नहीं। ऐसे मामलों की जांच संभागीय स्तर की टीम से होनी चाहिए।
युक्तियुक्तिकरण पर भी बड़ा आरोप
मुलाकात के दौरान अंकित गौरहा ने जिले में लागू युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश और कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी करते हुए इस प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है।
उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में कथित लेन-देन कर निर्णय बदले गए हैं और समय आने पर इस पूरे मामले का भी खुलासा किया जाएगा।
कोर्ट और आंदोलन की चेतावनी
पत्रकारों से चर्चा में गौरहा ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई तो वह इस मामले को मुख्य सचिव के सामने उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर करेंगे।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा।





