अंधविश्वास की कीमत जिंदगी: रायपुर में महिला को उम्रकैद, कोर्ट सख्त
इलाज के नाम पर अत्याचार, अंत में मौत: अदालत ने दिखाई सख्ती, उम्रकैद

रायपुर..झाड़-फूंक और चमत्कारी इलाज के नाम पर की गई प्रताड़ना आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गई। रायपुर की जिला अदालत ने युवती की मौत के मामले में आरोपी ईश्वरी साहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फैसले ने साफ कर दिया—अंधविश्वास और जबरन धार्मिक दबाव के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी।

इलाज के नाम पर महीनों तक अत्याचार
मामला गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र के ग्राम सुरसाबांधा का है। रायपुर की सुनीता सोनवानी अपनी मानसिक रूप से बीमार बेटी योगिता को उपचार के लिए आरोपी के पास छोड़ गई थीं। आरोप है कि आरोपी महिला खुद को चमत्कारी उपचार करने वाली बताती थी और गर्म तेल व पानी से इलाज का दावा करती थी।
शैतान’ बताकर डर, फिर प्रताड़ना
शिकायत के मुताबिक आरोपी ने युवती के शरीर में ‘शैतान’ होने की बात कही और उसी आधार पर इलाज शुरू किया। इस दौरान युवती के साथ शारीरिक प्रताड़ना की गई। विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। तीन महीने तक उसे अपने पास रखकर धार्मिक गतिविधियों में शामिल करने का भी आरोप सामने आया।
बिगड़ती हालत, फिर मौत
लगातार प्रताड़ना और कथित इलाज के बीच युवती की हालत बिगड़ती गई। उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच के आधार पर कोर्ट में सुनवाई हुई।
कोर्ट का स्पष्ट आदेश
अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून और टोनही प्रताड़ना से जुड़े प्रावधानों के तहत भी सजा दी गई।
कानून की सख्ती, समाज के लिए संकेत
फैसले ने यह स्पष्ट किया कि अंधविश्वास, झाड़-फूंक या किसी भी प्रकार के अवैज्ञानिक इलाज के नाम पर किसी की जान से खिलवाड़ करना गंभीर अपराध है। कानून ऐसे मामलों में सख्ती से हस्तक्षेप करेगा।




