रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)…वन परिक्षेत्र रामानुजगंज के ग्राम शिवपुर में रविवार सुबह नर हाथी के हमले में 69 वर्षीय ग्रामीण इन्द्रनाथ सिंह की मौत हो गई। इन्द्रनाथ सिंह सुबह करीब 5:30 बजे भैंस चराने जंगल की ओर गए थे। इसी दौरान उनका सामना नर हाथी से हो गया और हाथी ने उन पर हमला कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए रामानुजगंज स्थित 100 बिस्तरीय अस्पताल भेजा। घटना के बाद शिवपुर सहित आसपास के गांवों में हाथी की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल है।

सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में हाथियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान समय रहते प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बरतने के बजाय विभाग की सक्रियता अक्सर किसी अनहोनी के बाद दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों की नियमित निगरानी, संवेदनशील गांवों में समय पर सूचना और लोगों को जंगल से दूर रखने के ठोस इंतजाम लगातार होने चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं को टाला जा सके।

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ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि वन परिक्षेत्र में तैनात कुछ जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में नियमित भ्रमण और निगरानी के बजाय मुख्यालय से बाहर अधिक समय बिताते हैं। आरोप है कि सरकारी वाहन का इस्तेमाल कर अधिकारियों के बलरामपुर आने-जाने का सिलसिला बना रहता है। हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि अधिकारी मुख्यालय से बाहर रहते हैं तो हाथी प्रभावित गांवों और जंगलों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

रामानुजगंज वन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूर्व की घटनाएं भी विभाग के लिए गंभीर चेतावनी रही हैं। वन वाटिका में सागौन की लकड़ी काटकर ले जा रहे लोगों ने वनरक्षक पिंटू मालाकार पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके अलावा इसी वन वाटिका क्षेत्र में बिजली का तार बिछाए जाने से छह भैंसों की मौत का मामला भी सामने आया था। इस घटना में जिम्मेदार लोगों का पता लगाने और कार्रवाई को लेकर भी ग्रामीणों के बीच असंतोष रहा है।

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लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब इन्द्रनाथ सिंह की मौत ने वन विभाग की निगरानी और ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में केवल घटना के बाद पहुंचने के बजाय पहले से निगरानी, ग्रामीणों को अलर्ट करने, संवेदनशील इलाकों की पहचान और वन अमले की नियमित गश्त सुनिश्चित करना जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ने समय रहते ठोस व्यवस्था नहीं की तो रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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