भोपाल/रायपुर:आजाद अध्यापक शिक्षक संघ मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की नीतियों से खफा है संग यह मान कर चल रहा है कि शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश पर लगातार कैंची चल रही है।एक जमाना था जब कभी 60 दिन का अवकाश मिलता था, जो धीरे-धीरे घटकर 40 दिन हुआ और अब सत्र 2024-25 में मात्र 31 दिन रह गया है। लेकिन सरकार यहीं नहीं रुकी..! अब नए फरमान के तहत 1 मई से समर कैंप और नीट सहित अन्य परीक्षाओं के आयोजन ने अवकाश को और काटकर महज 7-8 दिन पर ला दिया है। मंहगाई जितनी तेजी से नहीं घटती, उससे कहीं ज्यादा रफ्तार से शिक्षकों के अवकाश कट रहे हैं। मध्यप्रदेश के करीब 4 लाख शिक्षक इस “छुट्टी” में भी काम करने को मजबूर हैं। समर कैंप के नाम पर 1 मई से स्कूलों में हाजिरी और परीक्षाओं की ड्यूटी ने शिक्षकों को बामुश्किल 5-7 दिन का विश्राम छोड़ा है।

इसे लेकर शिक्षक संवर्ग में गुस्सा फूट रहा है। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के प्रांतीय उपाध्यक्ष के.के. आर्य ने तल्ख लहजे में कहा है कि शिक्षकों से ऐसी क्या भूल हुई कि सरकार हमें इस तरह सजा दे रही है..?
सरकार को अब नियमों में परिवर्तन करके सभी शासकीय विभागों की तरह शिक्षकों को भी 30 दिन का अर्जित अवकाश और फाइव-डे वीक का लाभ दिया जाए।
उन्होंने मांग की कि समर कैंप 1 जून से शुरू हो, जब शिक्षक और बच्चे उपलब्ध हों। अभी शादी-ब्याह और घूमने-फिरने का मौसम है। बच्चे परिवारों के साथ बाहर हैं। ऐसे में समर कैंप महज एक खानापूरी बनकर रह जाएगा और शिक्षक अपने हक के अवकाश से वंचित हो जाएंगे।

छत्तीसगढ़ में भी स्कूल शिक्षा विभाग का यही प्रयोग

छत्तीसगढ़ में भी शिक्षकों का हाल मध्यप्रदेश से अलग नहीं है। यहां भी समर कैंप के नाम पर शिक्षकों की छुट्टियां छीनी जा रही हैं। यहां पर आदेश व्यक्ति बताए गए हैं लेकिन जिला स्तर के अधिकारी इस मौखिक रूप से अनिवार्य घोषित करते जा रहे हैं। इसलिए जमीनी हालात 1 मई से शुरू हुए समर कैंप और परीक्षा ड्यूटियों ने शिक्षकों को अवकाश के नाम पर सिर्फ खानापूरी दी है। शिक्षक खुलकर कह रहे हैं कि सरकार का यह रवैया उनकी मेहनत और समर्पण का अपमान है। जब बच्चे और अभिभावक छुट्टियों में व्यस्त हैं, तब समर कैंप जैसे आयोजन सिर्फ कागजी उपलब्धि बनकर रह जाते हैं, लेकिन शिक्षकों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं।

शिक्षक समाज अब खुलकर सवाल उठा रहा है आखिर सरकार शिक्षकों को इस तरह क्यों निचोड़ रही है ? क्या शिक्षक मशीन हैं, जिन्हें बिना विश्राम के चलाया जा सकता है..? सरकारों का यह प्रयोग कहीं ना कहीं शिक्षकों को थकाने वाला है । कसर आगामी सत्र में भी दिखाई दे सकता है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के शिक्षक अब सरकार से जवाब मांग रहे हैं और अपने हक के लिए आवाज बुलंद करने को तैयार हैं। ज्ञापनों और विरोध का दौर शुरू हो चुका है।