आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग मोबाइल से जुड़े रहते हैं। यहां तक कि कई लोग फोन को टॉयलेट तक ले जाते हैं और घंटों वहीं बैठे रहते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई रिसर्च ने इस आदत को बेहद खतरनाक बताया है। अध्ययन के मुताबिक, टॉयलेट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों को 46% ज्यादा बवासीर (Piles) का खतरा होता है।

बवासीर क्या है और कैसे होता है?
बवासीर एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुदा और मलाशय की नसें सूज जाती हैं। सामान्य तौर पर हर इंसान के शरीर में “हैमोरॉइडल कुशन” मौजूद होते हैं जो मल त्याग को नियंत्रित करते हैं, लेकिन लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने, कब्ज, गर्भावस्था और कम फाइबर वाली डाइट के कारण इन नसों पर दबाव बढ़ जाता है। इसी दबाव के चलते ये सूजकर बवासीर का रूप ले लेती हैं।

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रिसर्च में क्या पाया गया?

अमेरिका के बोस्टन स्थित बेथ इजराइल डीकोनेस मेडिकल सेंटर में की गई एक स्टडी में 45 साल से अधिक उम्र के 125 लोगों पर शोध किया गया। नतीजों में सामने आया कि 66% प्रतिभागी टॉयलेट में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते थे और उनमें बवासीर का खतरा 46% अधिक था।

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जो लोग फोन लेकर टॉयलेट में जाते थे उनमें से 37.3% लोग 5 मिनट से ज्यादा समय तक बैठे रहते थे, जबकि बिना फोन वाले केवल 7.1% ही इतने समय तक रुके।

क्यों खतरनाक है टॉयलेट में फोन का इस्तेमाल?
लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठना गुदा की नसों पर दबाव बढ़ा देता है। कुर्सी या सोफे के विपरीत टॉयलेट सीट शरीर को पर्याप्त सहारा नहीं देती, जिससे नसों पर तनाव और ज्यादा बढ़ जाता है। जब लोग फोन पर स्क्रॉलिंग, न्यूज पढ़ने या सोशल मीडिया में व्यस्त हो जाते हैं, तो वे जरूरत से ज्यादा देर टॉयलेट में बैठे रहते हैं। लगातार दबाव से रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं और बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।

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बवासीर से बचाव के आसान उपाय
स्मार्टफोन कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन करती हैं कि लोग ज्यादा देर तक इंगेज रहें, लेकिन यह आदत सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।

  • फोन को टॉयलेट में बिल्कुल न ले जाएं।

  • मल त्याग को छोटा और सरल रखें, केवल जरूरत के अनुसार ही समय दें।

  • पर्याप्त पानी पिएं ताकि कब्ज न हो।

  • फाइबर युक्त डाइट लें जिसमें फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल हों।

  • नियमित व्यायाम करें ताकि पाचन क्रिया बेहतर बनी रहे।