बिलासपुर…गांवों में बाल विवाह रोकने के लिए अब पंचायतों के साथ युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाएगी। बाल विवाह, नशे और बच्चों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जिला प्रशासन ने पंचायत प्रतिनिधियों और युवा वालंटियर्स को सीधे सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की पहल की है। बुधवार को कलेक्ट्रेट के मंथन सभाकक्ष में लैंगिक समानता, बाल संरक्षण एवं किशोर सशक्तिकरण को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला में इस दिशा में रणनीति पर चर्चा हुई।

जिला प्रशासन और यूनिसेफ-एग्रीकोन फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में सरपंच, पंचायत सचिव और युवोदय के युवा वालंटियर्स शामिल हुए। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि बाल विवाह रोकने और बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में पंचायतों के साथ युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने गांवों में सक्रिय युवा वालंटियर्स तैयार कर उन्हें सामुदायिक कल्याण और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को बाल विवाह मुक्त और नशा मुक्त ग्राम पंचायत बनाने की सामूहिक शपथ भी दिलाई गई। एसएसपी रजनेश सिंह ने नशामुक्त ग्राम पंचायत के लिए जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की संयुक्त भागीदारी को जरूरी बताया। वहीं जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने बाल मित्र ग्राम पंचायत की अवधारणा समझाते हुए बच्चों के लिए संवेदनशील और सुरक्षित वातावरण तैयार करने पर जोर दिया।

कार्यशाला में बाल संरक्षण, लैंगिक समानता, रेफरल सेवाओं और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। महिला एवं बाल विकास विभाग के सत्यनारायण राठौर, यूआरसीसी वासुदेव पांडेय, चाइल्डलाइन की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रीमा और यूनिसेफ स्टेट टीम के एसबीसीसी विशेषज्ञ अभिषेक सिंह ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम का समन्वय यूनिसेफ-एग्रीकोन के जिला समन्वयक चेतन यादव और उनकी टीम ने किया। कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं ने सुरक्षित बचपन, समान अवसर और किशोर-किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए गांव स्तर पर मिलकर काम करने का संकल्प लिया।