अंबिकापुर (.पृथ्वीलाल केशरी).. सीतापुर में विधायक  राजकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के बीच हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। सरगुजा पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर अलग-अलग धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। एक ओर विधायक की बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ मामला कायम हुआ है, वहीं दूसरी ओर नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके 13-14 समर्थकों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

मामले ने अब पूरे सरगुजा संभाग की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

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महिला ने लगाया जातिगत गाली का आरोप

जानकारी के अनुसार विधायक रामकुमार टोप्पो की बहन सीमा धनकी ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने उनके साथ जातिगत गाली-गलौज की, अश्लील इशारे किए और अभद्र व्यवहार करते हुए धक्का-मुक्की कर कार्यालय से बाहर निकाल दिया।

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महिला की शिकायत पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 296, 351(2) और 79 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार ये धाराएं महिला उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार से जुड़ी हैं।

 विधायक सहित समर्थकों पर गैर जमानती धाराएं

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दूसरी ओर नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों ने शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई और कार्यालय में हंगामा किया।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने विधायक सहित अन्य लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 221, 121(1), 191(2) तथा 132 के तहत अपराध दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि इन धाराओं में गैर जमानती प्रावधान शामिल हैं।

घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच में जुटी हुई है।

 आखिर क्यों सबसे ज्यादा सवाल 

सीतापुर का यह विवाद केवल एक विधायक और अधिकारी के बीच टकराव भर नहीं माना जा रहा, बल्कि यह पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर उठते लगातार सवालों का हिस्सा बनता जा रहा है।

सरगुजा संभाग में बीते कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व विभाग को लेकर सामने आई हैं। कलेक्टर जनदर्शन से लेकर समाधान शिविर तक, जमीन विवाद, सीमांकन, नामांतरण, कब्जा, रिकॉर्ड सुधार और शासकीय भूमि से जुड़े मामलों की शिकायतें लगातार बढ़ती रही हैं।

बलरामपुर जिले में भी कई जनप्रतिनिधि राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। समरी विधायक उदेश्वरी पैकरा ने राजपुर एसडीएम और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई बार नाराजगी जताई। वहीं प्रतापपुर विधायक Shakuntala Singh Porte भी खुले मंच से पटवारियों और तहसीलदारों के रवैये पर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि “गांवों के अधिकांश झगड़ों की जड़ पटवारी होते हैं।”

 आखिर किसे मिल रहा न्याय?

सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि आखिर आम जनता इस पूरी व्यवस्था में कहां खड़ी है? भारतीय जनता पार्टी हो या कांग्रेस, दोनों ही दल एक-दूसरे पर राजनीतिक हमला करने में तो सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन जब बात जमीन स्तर पर जनता की समस्याओं की आती है तो हालात जस के तस नजर आते हैं।

यदि वर्षों से राजस्व विभाग को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं, तो फिर सुधार क्यों नहीं हो पा रहा?
यदि भूमाफिया सक्रिय हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?
यदि शासकीय जमीनों में घोटाले हुए हैं तो जांच आगे क्यों नहीं बढ़ती?

बलरामपुर और सरगुजा संभाग के कई नगरीय क्षेत्रों में शासकीय जमीनों से जुड़े गंभीर आरोप वर्षों से चर्चा में हैं, लेकिन आज तक बड़े स्तर पर निर्णायक कार्रवाई नहीं दिखी।

भू-माफिया पर कार्रवाई” का वादा 

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के दौरान यह दावा किया गया था कि भूमाफिया और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा तेज है कि जिन लोगों पर कार्रवाई होनी थी, वही आज सत्ता और रसूख के करीब दिखाई दे रहे हैं।

आम लोगों का आरोप है कि एक मामूली काम के लिए उन्हें महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि रसूखदार लोगों के काम फाइल खुलने से पहले ही पूरे हो जाते हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक तंत्र को लेकर जनता में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

सीतापुर का यह मामला अब केवल एक एफआईआर का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना बनता जा रहा है जहां राजनीति, प्रशासन और जनता — तीनों आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।