बिश्रामपुर: (मनीष जायसवाल) सूरजपुर जिले के शिवनन्दनपुर नगर पंचायत चुनाव का मतदान एक जून को होना है और परिणाम चार जून को आएंगे। लेकिन नतीजों से पहले ही यह चुनाव उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा संदेश देने लगा है। एक स्थानीय चुनावी विवाद जिस तरह राजनीतिक आंदोलन में बदला, उसने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति फिर सड़क पर दिखाई दे सकती है।

चुनावी बहस, थाने तक पहुंचा विवाद, कांग्रेस नेताओं का धरना, आमरण अनशन और आखिर में प्रशासन का बातचीत के लिए आगे आना । इन सबने मिलकर इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य राजनीतिक घटना से कहीं बड़ा बना दिया है।

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शुरुआत एक स्थानीय विवाद से हुई। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष और पत्रकार नरेंद्र जैन के परिवार ने भाजपा कार्यकर्ता पर धमकी और गाली-गलौज का आरोप लगाया। मामला थाने पहुंचा और पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे विवाद स्थानीय राजनीति तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन शिवनन्दनपुर में यह मामला कांग्रेस के लिए राजनीतिक संघर्ष का मुद्दा बन गया।

कांग्रेस ने इसे केवल एक परिवार या स्थानीय नेता का विवाद नहीं बताया, इसे राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक पक्षपात से जोड़कर बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की। यहीं से पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।

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सरगुजा से लेकर रायपुर तक कांग्रेस नेताओं की सक्रियता अचानक बढ़ गई। पहले धरना शुरू हुआ, फिर आमरण अनशन तक बात पहुंच गई। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद मैदान में उतर आए। इसे केवल राजनीतिक समर्थन भर नहीं माना गया, इसे कांग्रेस की उस रणनीति के संकेत के रूप में देखा गया जिसमें विपक्ष की भूमिका अब सड़क पर निभाने की तैयारी दिखाई दे रही है।

तीन दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रशासन को बातचीत के लिए आगे आना पड़ा। एसडीएम धरना स्थल पहुंचीं, मांगों पर सहमति बनी और आखिरकार नारियल पानी पीकर आमरण अनशन समाप्त हुआ। राजनीति में कई बार जीत अदालत या चुनाव में नहीं होती, वह माहौल बनाने में होती है। कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए फिलहाल वही करती दिखाई दी। पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है और संघर्ष की राजनीति से पीछे हटने वाली नहीं है।

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इस पूरे घटनाक्रम में एक और चेहरा चर्चा में आया वह थे आदित्य शरण सिंहदेव..! अब तक उन्हें ज्यादातर लोग टी.एस. सिंहदेव के भतीजे और सरगुजा जिला पंचायत उपाध्यक्ष के रूप में जानते थे। लेकिन इस आंदोलन में वह लगातार टी.एस. सिंहदेव के साथ दिखाई दिए। धरना स्थल पर मौजूदगी, उपवास में शामिल होना और बाद में वायरल हुई तस्वीरों ने उन्हें राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।

राजनीति में पहचान केवल पद से नहीं बनती, कई बार आंदोलन और संघर्ष भी नए चेहरों को सामने ले आते हैं। आदित्य शरण सिंहदेव के लिए यह वैसा ही अवसर माना जा रहा है। हालांकि राजनीति में एक आंदोलन किसी को बड़ा नेता नहीं बना देता, लेकिन यह जरूर तय करता है कि मैदान में कौन सक्रिय दिखाई दे रहा है और कौन नहीं। कांग्रेस के भीतर भी लंबे समय से युवा चेहरों की तलाश महसूस की जा रही है। ऐसे में उनकी सक्रियता को केवल पारिवारिक उपस्थिति मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

इस आंदोलन के दौरान टी.एस. सिंहदेव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का एक जैसा बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा ..! पुलिस प्रशासन ने सबको एक कर दिया ..! यह केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं थी। इस एक वाक्य में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति और भविष्य की रणनीति दोनों दिखाई देती हैं।

पिछले कुछ समय से कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी दूरी की चर्चा लगातार होती रही है। शिवनन्दनपुर आंदोलन ने कम से कम सार्वजनिक रूप से यह तस्वीर बदलने की कोशिश जरूर की है। भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव और दीपक बैज का एक मंच पर दिखाई देना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए भी अलग संदेश माना जा रहा है..।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार को अभी करीब ढाई साल हुए हैं। भाजपा की सरकार सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों के जरिए अभी से चुनावी मोड में दिखाई दे रही है। वहीं कांग्रेस अब तक बड़े मुद्दे और सही मौके की तलाश में नजर आ रही थी। लेकिन शिवनन्दनपुर विवाद के बाद पार्टी ने संघर्ष का रास्ता चुनकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि 2028 की राजनीतिक लड़ाई की तैयारी समय से पहले शुरू हो चुकी है..!

सड़क की राजनीति हमेशा विपक्ष को ऊर्जा देती है और कांग्रेस फिलहाल उसी रास्ते पर लौटती दिखाई दे रही है।

सरगुजा संभाग लंबे समय से टी.एस. सिंहदेव का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां बड़ा नुकसान हुआ था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि उस समय चली अंदरूनी खींचतान का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ा। ऐसे माहौल में शिवनन्दनपुर आंदोलन के दौरान टी.एस. सिंहदेव का कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय होकर खड़ा होना, भूपेश बघेल और दीपक बैज का साथ दिखाई देना। इसे केवल एक आंदोलन नहीं, कांग्रेस की आक्रामक राजनीतिक वापसी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

राजनीति में अवसर अचानक बनते हैं। कई बार छोटे स्थानीय मुद्दे बड़े राजनीतिक संदेश दे जाते हैं। शिवनन्दनपुर फिलहाल उसी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। नगर पंचायत चुनाव से शुरू हुआ यह विवाद अब सत्ता, संगठन, नेतृत्व और भविष्य की राजनीति के संकेत देने लगा है।

सरगुजा की राजनीति में फिलहाल एक संदेश साफ सुनाई दे रहा है संघर्ष की राजनीति अभी खत्म नहीं हुई है। और जैसा एक फिल्मी डायलॉग है, टाइगर अभी जिंदा है।