बिलासपुर…कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर सोमवार को बिलासपुर में कांग्रेस ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस भवन से निकली रैली गांधी चौक, नेहरू चौक होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। यहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की घेराबंदी के बीच उनका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंक दिया। पुतला दहन रोकने पुलिस ने पानी की बौछार की, लेकिन कार्यकर्ता पुतले लेकर डटे रहे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पुतलों को लेकर खींचतान और धक्का-मुक्की भी हुई।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इस्तीफा दो’, ‘जेल भेजो’, ‘फांसी दो’ जैसे नारे लगाते रहे। कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में काम करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। ये आरोप और नारे कांग्रेस के राजनीतिक दावे रहे, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रदर्शन स्थल पर नहीं हुई।

प्रदर्शन में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पांडे, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभय नारायण राय, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय पांडे, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद नायक मंडी पूर्व अध्यक्ष राजेश शुक्ला, राजेंद्र साहू ‘डब्बू’, लक्ष्मी नारायण साहू समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल रहे। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री शिल्पी तिवारी सीमा पांडे की अगुवाई में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार, भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ लिखे पोस्टर थे। नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। उनका कहना था कि मतदाताओं के अधिकार से जुड़े किसी भी फैसले में पारदर्शिता और सभी स्तरों पर विश्वास जरूरी है।

धरने के बीच पुतलों का मोर्चा, बौछार के बाद भी नहीं बुझी आग

कलेक्टर कार्यालय के सामने एक तरफ कांग्रेस के बड़े नेता और कार्यकर्ता सड़क पर बैठकर धरना दे रहे थे। नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के बीच नेता अपना आक्रोश जाहिर कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ समीर अहमद ‘बबला’ की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक समूह पुतला दहन के लिए आगे बढ़ा।

कार्यकर्ताओं के हाथों में एक नहीं, बल्कि कई पुतले थे। पुलिस ने पुतला दहन रोकने के लिए लगातार पानी की बौछार की और जैसे ही किसी पुतले में आग लगती, उसे बुझाने की कोशिश की जाती। कांग्रेस कार्यकर्ता भी पुतलों को बचाकर पीछे हटते और फिर आगे बढ़कर आग लगाने का प्रयास करते रहे। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच इस दौरान पुतलों को लेकर खींचतान और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही।

पुलिस की लगातार कोशिशों के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता आखिरकार पुतला दहन करने में सफल रहे। कुछ देर के लिए कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर धरना, नारेबाजी, पानी की बौछार और पुतला दहन का यह पूरा घटनाक्रम प्रदर्शन का सबसे प्रमुख दृश्य बन गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे।

14 आपत्तियों ने बढ़ाया सियासी तापमान

कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में पार्टी ने निर्वाचन आयोग के भीतर पिछले 10 महीनों में सामने आई कथित असहमति का हवाला दिया।

हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, एसआईआर और मतदाता डेटा व आईटी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण फैसलों में अन्य निर्वाचन आयुक्तों और राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका को नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस ने इसी आधार पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई।

हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया है कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव और अलग-अलग मत उसकी आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा एसआईआर समेत महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग द्वारा लिए गए हैं।

अटल, शैलेश और अभय ने संभाला मोर्चा

प्रदर्शन में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने कांग्रेस के आंदोलन को राजनीतिक वजन दिया। विधायक अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक शैलेश पांडे और प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभय नारायण राय समेत नेताओं ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतांत्रिक अधिकारों से सीधे जुड़ा विषय है और कांग्रेस इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेगी।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, विरोध जारी रहेगा। शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर पीछे नहीं हटेगी।