बिलासपुर। शहर के प्रशासनिक कामकाज का अहम केंद्र पुरानी कम्पोजिट बिल्डिंग अब खुद बदहाली की मिसाल बन गई है। 1959 में बनी यह इमारत लगातार हो रही बारिश के बाद जगह-जगह टपकने लगी है। कई कार्यालयों में पानी भरने से न सिर्फ कर्मचारियों का काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि रोजाना अपने काम से पहुंचने वाले नागरिकों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

बुधवार को भवन में संचालित विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बरसात के दौरान छतों से लगातार पानी रिस रहा है, जिससे कार्यालयों में काम करना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर रिकॉर्ड और कार्यालयीन सामग्री को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सबसे अहम मांग 67 वर्ष पुरानी इस भवन को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नई प्रशासनिक इमारत के निर्माण की है। इसके साथ ही तत्काल मरम्मत, रंग-रोगन, पुरुष एवं महिला कर्मचारियों के लिए नए और सुरक्षित शौचालय, पर्याप्त वाहन पार्किंग तथा भवन की बढ़ती बिजली आवश्यकता को देखते हुए नया ट्रांसफॉर्मर और विद्युत लाइन स्थापित करने की मांग भी की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बैठक के दौरान ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से फोन पर चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि बारिश का मौसम समाप्त होते ही सितंबर से आवश्यक मरम्मत और अन्य कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रही यह इमारत अब अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। ऐसे में केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान के रूप में नई भवन योजना पर शीघ्र निर्णय लिया जाना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित एवं बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।