Cg news।छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऐप के जरिए शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने और इसी आधार पर वेतन भुगतान करने के फैसले को लेकर विवाद काफी गहरा गया है।

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को जारी कड़े निर्देशों के बाद प्रदेशभर के शिक्षक और कर्मचारी संगठन लामबंद हो गए हैं।

विभाग ने जुलाई माह का वेतन VSK ऐप में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही जारी करने का आदेश दिया है, जबकि जमीनी स्तर पर सर्वर क्रैश और नेटवर्क समस्याओं के चलते हजारों शिक्षकों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पाई है।

शिक्षकों का कहना है कि विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण, बस्तर और सरगुजा संभाग के वनांचल क्षेत्रों में इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की भारी समस्या है। इसके अलावा ऐप में आ रही बार-बार की तकनीकी त्रुटियों के कारण समय पर उपस्थिति दर्ज कर पाना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन हो रहा है।

इसके बावजूद ऑनलाइन हाजिरी न होने की स्थिति में सीधे वेतन रोकने के फरमान से शिक्षकों में भारी असुरक्षा और नाराजगी व्याप्त है।

विवाद बढ़ता देख राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य शिक्षकों को प्रताड़ित करना या परेशान करना नहीं है, बल्कि पूरी स्कूली शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाना है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि ऐप में किसी भी तरह की तकनीकी खामी या नेटवर्क से जुड़ा कोई व्यवधान सामने आता है, तो विभाग प्राथमिकता के आधार पर उसका संज्ञान लेकर आवश्यक सुधार करेगा। हालांकि, उन्होंने वेतन भुगतान से जुड़े वर्तमान आदेश में किसी तात्कालिक ढील या बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं।

दूसरी ओर, ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर ही वेतन जारी करने की अनिवार्यता के खिलाफ राज्य के लगभग सभी प्रमुख शिक्षक संगठनों ने एकसुर में मोर्चा खोल दिया है। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, शालेय शिक्षक संघ, संयुक्त शिक्षक संघ, नवीन शिक्षक संघ और सर्व शिक्षक संघ सहित आधा दर्जन से अधिक संगठनों ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

शिक्षक संघों की मांग है कि जब तक सभी स्कूलों में आधारभूत इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होता और ऐप पूरी तरह त्रुटिरहित काम नहीं करने लगता, तब तक पूर्व की भांति ऑफलाइन उपस्थिति पंजी के आधार पर ही वेतन का सुचारू भुगतान किया जाए।