बिलासपुर… तंबाकू नियंत्रण एवं मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को दीक्षित सभा भवन में शिक्षकों और नोडल अधिकारियों के लिए एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि “बच्चों को नशे की लत से बचाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

समाज को लौटाना भी जिम्मेदारी

कलेक्टर अग्रवाल ने कहा कि समाज हमें बहुत कुछ देता है, और यदि शिक्षक अपने आचरण व मार्गदर्शन से विद्यार्थियों में जागरूकता की भावना जगा सकें, तो यह समाज सेवा का सर्वोत्तम रूप होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को सही दिशा देने और नशे के प्रभाव से दूर रखने के लिए शिक्षकों को अधिक सजगता की आवश्यकता है। कलेक्टर ने यह भी अपील की कि नशे से संबंधित किसी भी जानकारी पर तुरंत पुलिस को सूचित करें और तंबाकू नियंत्रण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करें। जागरूकता ही नशे से मुक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। ड्यूटी से आगे बढ़कर यदि हम सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं, तो कई परिवारों का भविष्य संवारा जा सकता है।

नशे की जड़ें सामाजिक बुराइयों में

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि नशा कई सामाजिक अपराधों और पारिवारिक टूटन की जड़ है। उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन समाज की भागीदारी के बिना स्थायी परिणाम संभव नहीं हैं।
ब्रह्मकुमारी की स्वाति दीदी ने कहा कि यदि परिवार और स्कूल मिलकर बच्चों को दिशा दें, तो नशे की प्रवृत्ति को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है।

शिक्षकों ने साझा किए अनुभव, लिया संकल्प

कार्यशाला में विभिन्न शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए। रतनपुर के शिक्षक अशोक शर्मा और घुटकू के शिक्षक रोहित भांगे ने बताया कि उन्होंने विद्यालयों में संवाद और सामूहिक चर्चाओं के माध्यम से बच्चों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों को “नशा मुक्त भारत” के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दिलाया।

 400 से अधिक शिक्षक जुड़ चुके अभियान से

जिले में चल रहे “नशा मुक्त भारत अभियान” से अब तक 400 से अधिक शिक्षक जुड़ चुके हैं। ये शिक्षक न केवल विद्यालयों में बच्चों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे हैं, बल्कि अभिभावकों और समुदाय के बीच भी जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के प्रत्येक विकासखंड में नोडल शिक्षक नियुक्त किए गए हैं, जो स्कूलों में नशा मुक्ति पर गोष्ठियां, रैलियां और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गढ़ेवाल ने कहा कि नशा नियंत्रण केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का विषय है। इसके लिए शिक्षा, पुलिस और समाज के बीच समन्वय आवश्यक है।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक माहौल और जीवन कौशल शिक्षा से ही हम बच्चों को नशे जैसी प्रवृत्तियों से दूर रख सकते हैं।

कार्यशाला का समापन कलेक्टर संजय अग्रवाल के आह्वान के साथ हुआ। सभी शिक्षकों ने हाथ उठाकर नशा मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।