बिलासपुर। हाई कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार और समान अवसर को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि कल्याणकारी राज्य में बच्चों की बुनियादी शिक्षा के मामले में किसी भी तरह का क्षेत्रीय भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में एलकेजी कक्षाएं शुरू नहीं की जा रही थीं।

साजा ब्लॉक के राजमोहगांव सहित कई क्षेत्रों में बजट, बुनियादी ढांचे और स्टाफ की कमी का हवाला देकर यह कक्षाएं टाल दी गई थीं, जबकि राज्य के अधिकांश जिलों में स्वामी आत्मानंद स्कूलों में एलकेजी स्तर से ही बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा है।

इस भेदभावपूर्ण रवैये से परेशान होकर सूरज साहू, सुदर्शन, गोविंद पटेल सहित कई अभिभावकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि यह फैसला प्रशासनिक और नीतिगत है, जो स्थानीय जरूरतों के आधार पर तय होता है।

हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित स्कूल के हेडमास्टर द्वारा फरवरी 2026 में जारी पत्रों से यह स्पष्ट हुआ कि कक्षाएं केवल फंड और स्टाफ की कमी के कारण शुरू नहीं हो पाई थीं।

इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन और शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों में तत्काल एलकेजी कक्षाएं शुरू की जाएं और चार हफ्ते के भीतर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इस फैसले से बेमेतरा जिले के छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

वहीं दूसरी ओर बिलासपुर शहर के स्वामी आत्मानंद स्कूल की नर्सरी कक्षा में डीएमएफ नियमों में बदलाव के चलते इस साल सौ बच्चों को प्रवेश नहीं मिल सका, जिसकी वजह फंड की कमी बताई जा रही है।