बिलासपुर।हाई कोर्ट ने एसईसीआर के लोको पायलटों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने रेलवे प्रशासन के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत प्रमोशन के बाद कर्मचारियों का तबादला दूरस्थ स्टेशनों पर किया गया था।

चीफ जस्टिस कृष्णा राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर के आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है।

साथ ही कोर्ट ने कैट को मूल याचिका का जल्द से जल्द निपटारा करने के निर्देश भी दिए हैं।

यह मामला ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन और अन्य लोको पायलटों द्वारा हाई कोर्ट में दाखिल याचिका से जुड़ा है।

याचिका में बताया गया था कि याचिकाकर्ता पहले सहायक लोको पायलट के पद पर तैनात थे। 4 दिसंबर 2025 को उन्हें पदोन्नत कर लोको पायलट गुड्स के पद पर प्रमोशन दिया गया, लेकिन इसके तुरंत बाद रेलवे ने उनका तबादला दूरदराज के 10 स्टेशनों पर कर दिया।

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने पैरवी करते हुए कहा कि प्रमोशन के बाद कर्मचारियों को पहले उनके मौजूदा स्टेशनों पर ही समायोजित किया गया था।

इसके बाद सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमित व्यवस्था के तहत उन्हें अन्य स्थानों पर तबादला किया गया, जो नियमों के अनुसार ही है।

हाई कोर्ट ने रेलवे के इस तर्क को सही मानते हुए कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा तबादले के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करने का निर्णय पूरी तरह उचित है। इस फैसले से रेलवे प्रशासन को राहत मिली है, वहीं अब मामले का अंतिम निपटारा कैट के स्तर पर होगा।