Cg news।संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं ने मंगलवार को इस साल दूसरी बार प्रदेश के सभी सीएमएचओ और सिविल सर्जन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

आदेश में कहा गया है कि उनके कार्यालयों में संलग्न कर्मचारियों को तीन दिन के भीतर मूल पदस्थापना पर वापस भेजा जाए। साथ ही 12 मार्च के आदेश की तरह इस बार भी संलग्नीकरण खत्म किए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों से स्वयं के हस्ताक्षर वाला प्रमाण-पत्र देने को कहा गया है।

दुर्ग जिले में यदि यह आदेश दोनों अधिकारी पूरी तरह से लागू करते हैं तो करीब 90 फीसदी राष्ट्रीय कार्यक्रमों के जिला नोडल अधिकारियों को बदलना पड़ सकता है।

इसकी वजह यह है कि सीएमएचओ कार्यालय में डॉक्टरों की लंबे समय से कमी बनी हुई है। जिला क्षय रोग अधिकारी, जिला सर्विलांस अधिकारी, जिला टीकाकरण अधिकारी, अंधत्व निवारण और जननी सुरक्षा योजना के नोडल का काम संभाल रहे डॉक्टर वास्तव में अलग-अलग जगहों पर पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें सीएमएचओ कार्यालय में संलग्न किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी संलग्नीकरण निरस्त करने का आदेश आ चुका है, जिसके बाद कागजों में सभी अधिकारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर भेज दिया गया था और इसके लिए प्रमाण-पत्र भी जारी किए गए थे।

लेकिन हकीकत में जिन अधिकारियों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों के नोडल का जिम्मा मिला था, वे आज भी वही काम संभाल रहे हैं। यानी कागजों में संलग्नीकरण खत्म हो चुका है, लेकिन व्यवहार में व्यवस्था पहले जैसी ही चल रही है।

सीएमएचओ कार्यालय में सिर्फ राष्ट्रीय कार्यक्रमों के नोडल ही नहीं, बल्कि जिला मेडिसिन स्टोर से लेकर डॉक्टरों की वीआईपी ड्यूटी लगाने वाले पटल तक कई जगह संलग्न कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।

संलग्न किए गए कुछ डॉक्टर अस्पतालों के संचालन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, जबकि उनकी मूल पदस्थापना किसी दूसरे अस्पताल में है।

इस संलग्नीकरण का सबसे बड़ा असर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी मूल पदस्थापना वाले अस्पतालों में उनकी जरूरत बनी रहती है। नए आदेश से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार व्यवस्था कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी लागू होगी।