रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता संवर्ग के लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय DPI ने सख्ती दिखाई है। संचालनालय ने संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है, व्याख्याताओं से जुड़े सभी लंबित प्रकरणों की पूरी जानकारी 24 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से जमा करें।

जारी पत्र में डीपीआई ने कहा है, तय डेडलाइन के आधार पर जानकारी नहीं भेजने या विलंब होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। जाहिर है लापरवाही का ठिकरा इन्हीं पर फूटेगा।

डीपीआई द्वारा जारी निर्देश पर गौर करें तो, ई और टी संवर्ग के व्याख्याताओं के लंबित मामलों की अलग-अलग जानकारी निर्धारित प्रारूप में तैयार करनी होगी।

समयमान वेतनमान, परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद की कार्रवाई, नियमितीकरण, संविलियन और न्यायालयीन प्रकरणों के साथ अवकाश से जुड़े मामलों की जानकारी देनी होगी।

कोर्ट से जुड़े मामलों को अलग-अलग फोल्डर में रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रत्येक प्रकरण की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आ सके।

31 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2027 के बीच सेवानिवृत्त होने वाले व्याख्याताओं की सूची अलग से मांगी गई है। आगे की पढ़ाई या उच्च परीक्षाओं में शामिल होने के लिए अनुमति से जुड़े लंबित आवेदन भी रिपोर्ट में शामिल करने होंगे।

समयमान वेतनमान: 10 और 20 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके व्याख्याताओं के प्रथम और द्वितीय समयमान वेतनमान के मामले अटके हुए हैं। सर्विस बुक की जांच और संभाग स्तर पर सत्यापन पूरा न होने से इन्हें बढ़े हुए वेतन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण : वर्ष 2019 से 2021 के बीच सीधी भर्ती और पदोन्नति से आए व्याख्याताओं की दो से तीन साल की परिवीक्षा अवधि पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक उनके नियमितीकरण व स्थायीकरण का औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

हाई कोर्ट में लंबित अदालती मामले: पूर्व सेवा गणना, पदोन्नति में वरिष्ठता और क्रमोन्नति वेतन विसंगति से जुड़े कई मामले छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में चल रहे हैं। इनमें नियमित रिट याचिकाओं के साथ अवमानना के मामले भी शामिल हैं।