( गिरिजेय )  छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सरकारी सेवाओं को सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचाने के मकसद से सुशासन तिहार मनाया जा रहा है। 1 मई से शुरू हुआ यह अभियान अब अंतिम चरण में है। करीब 40 दिन से चल रही इस मुहिम से आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सका या नहीं…। लेकिन आखिरी दौर में सियासत के लिहाज से एक बात साफ समझ में आ रही है कि कई जगह प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के लोगों ने शिविर में पहुंचकर जन समस्याओं से जुड़े सवाल उठाए। जिसमें यह साफ दिखा कि सुशासन तिहार के नाम पर भीड़ तो प्रशासन की ओर से इकट्ठी की गई । मगर कांग्रेस के लोग अपनी धमक का अहसास कराने और तालियां बटोरने में कामयाब रहे।

जैसा कि मालूम है कि छत्तीसगढ़ में 1 मई से सुशासन तिहाडर की शुरुआत हुई है ।इस राज्यव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचाना और जन समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 15 – 20 ग्राम पंचायत के समूह और शहरी क्षेत्र में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाये जा रहे हैं। मकसद है कि शिविरों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, मनरेगा से जुड़े कार्य,जाति /निवास प्रमाण पत्र, हैंडपंप सुधार और ट्रांसफार्मर जैसी स्थानीय समस्याओं पर आवेदन लेकर उनका ऑन द स्पॉट 1 महीने के भीतर निराकरण सुनिश्चित करना है। इस आयोजन को कामयाब बनाने के लिए प्रदेश के मंत्री, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव भी समय-समय पर शिविरों में शामिल होकर इंतजाम का मुआयना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कई जिलों का दौरा कर औचक निरीक्षण कर रहे हैं। वे स्थानीय सामाजिक संगठनों से भी सीधा फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं।

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सुशासन तिहार के इन  शिविरों में लोगों की समस्याओं का ऑन द स्पॉट निराकरण हो पा रहा है या नहीं, इस पर अलग से बात हो सकती है। लेकिन जहां तक सियासत का सवाल है प्रदेश में सरकार चला रही भाजपा को उम्मीद है कि सुशासन तिहार के शिविरों के जरिए वह आम लोगों से सीधे जुड़ रही है। लोगों से समस्याओं की जानकारी लेकर उन्हें यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि समय पर निराकरण भी हो जाएगा। इस लिहाज से बीजेपी को पॉलीटिकल माइलेज मिलने की उम्मीद है। जिसे सामने रखकर पार्टी के तमाम नेता इस अभियान में जुटे हैं। लेकिन प्रमुख पक्षी दल कांग्रेस भी इस दौरान पीछे नजर नहीं आती। कम से कम बिलासपुर जिले में तो इसका नमूना देखा जा सकता है। जहां सुशासन तिहार के शिविरों में भीड़ सरकार की पहल पर इकट्ठी हो रही है और कांग्रेस के लोग अपनी धमक दिखाने में भी कामयाब नजर आ रहे हैं।

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इसकी शुरुआत बिल्हा ब्लॉक के गोढ़ी शिविर में दिखाई दी थी। जहां शिविर के दौरान पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और बिल्हा सीट के पूर्व कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र शुक्ला अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। उन्होंने पेयजल, बिजली जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। राजेंद्र शुक्ल ने मौजूद भीड़ के बीच पूछा कि पीएचई की ओर से बोर क्यों नहीं किया जा रहे हैं। बीएमओ शिविर में क्यों नहीं आए। एक इस दौरान एक किसान मूंग की सूखी फसल लेकर पहुंचा। जिसे दिखाते हुए राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि समय पर बिजली की बेहिसाब कटौती की वजह से फसल की सिंचाई नहीं हुई। जिससे किसान की फसल सूख गई। उन्होंने किसान को मुआवजा देने की मांग की। इस दौरान बिल्हा के मौजूदा विधायक और पूर्व विधानसभा स्पीकर धरमलाल कौशिक भी शिविर में मौजूद थे। दोनों पक्ष आमने-सामने होने की वजह से कुछ समय के लिए विवाद की स्थिति भी बनी।

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इसके बाद नगर इसके बाद बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के नगोई में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। जहां पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा उम्मीदवार विजय केशरवानी कांग्रेस के साथियों ,पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ शिविर में पहुंच गए। उनकी मांग थी कि बेलतरा विधानसभा से जुड़ी पेंडिंग समस्याओं और मांगों को सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाया जाए। इतना ही नहीं इन समस्याओं का निराकरण कब तक होगा, इसकी समय सीमा भी बताई जाए। उन्होंने अपनी ओर से 15 सूत्रीय मांगों का मंच से वाचन किया। इसी दौरान जिला पंचायत सदस्य स्मृति श्रीवास ने भी मंच से बोलते हुए अपने क्षेत्र की समस्याएं रखीं । उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि पिछले 2 साल से इलाके में बिजली और पेय जल की बड़ी समस्या है। राजस्व विभाग की लापरवाही से लोग परेशान हो रहे हैं । बेलतरा इलाके के लोग इतना हलकान इससे पहले कभी नहीं हुए।

सुसान तिहार का समापन 10 जून को हो रहा है। यह मुहिम कितनी कामयाब रही यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के लोगों ने जिस तरह जगह-जगह अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। उसके जरिए यह साबित करने की कोशिश हुई है कि सुशासन तिहार ढकोसला है। गौरतलब है कि करीब 10 साल पहले जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहते हुए राजेंद्र शुक्ल ने उस समय लोक सुराज अभियान के दौरान इस तरह की मुहिम शुरू की थी। तब वे कांग्रेस की ओर से “गांव चलो चौपाल लगाओ” अभियान चलाते थे। जिसमें लोग सुराज अभियान के शिविरों में पहुंचकर यह सवाल किया जाता था कि लोगों की समस्याएं क्या है और क्या उनका निराकरण भी हो रहा है। इस बार भी राजेंद्र शुक्ल ने बिल्हा इलाके के गोढ़ी शिविर में पहुंचकर इस तरह की शुरुआत की। राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि जनता के बीच पहुंचकर उनकी बात की जाए तो समर्थन मिलता है । क्योंकि लोग अपनी समस्याओं से परेशान हैं और सुशासन तिहार जैसा ढकोसला उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पाता। उनका कहना है कि सुशासन तिहार शिविर में ढाई बजे तक प्रशासन के लोग जनता से आवेदन लेते हैं। इसके बाद 3 बजे शिविर खत्म हो जाता है। ऐसे में ऑन द स्पॉट निराकरण कैसे होगा यह सबसे अहम सवाल है। यही वजह है कि जब भी विपक्ष के लोग ऐसे जगह खड़े होते हैं तो लोग उनके साथ हो जाते हैं और इससे साबित होता है कि सरकार की सुशासन तिहार जैसी मुहिम केवल दिखावा है। वैसे भी नियमित रूप से चलने वाले जनदर्शन जैसे प्रशासनिक कार्यक्रमों में भी लोगों के आवेदन का निराकरण नहीं हो पाता । जिससे लोग भारी निराश – हताशा हैं।

गौर करने की बात यह भी है कि नीट परीक्षा पेपर लीक, पानी, बिजली जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस की ओर से सड़क – चौराहे पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जाहिर सी बात है कि ऐसे प्रदर्शन में पार्टी के ही लोग इकट्ठे होते हैं। लेकिन जिस जगह आम लोग इकट्ठे हों अगर वहां अपनी बात पहुंचाई जाए तो यह अधिक कारगर हो सकता है। सुशासन तिहार में प्रशासन की ओर से जुटाई गई भीड़ के बीच सवाल उठाने की इस मुहिम को इस नजरिए से भी देखा जा सहा है।