बिलासपुर… तिरंगा सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, 140 करोड़ भारतीयों की आन, बान और शान है। इसके सम्मान में जब कोई शहर एक साथ कदम बढ़ाता है तो वह महज रैली नहीं रहती, बल्कि राष्ट्रीय भावना का जीवंत दृश्य बन जाती है। मंगलवार को न्यायधानी बिलासपुर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कलेक्टर संजय अग्रवाल से लेकर एसएसपी रजनेश सिंह तक, पुलिस जवानों से लेकर खिलाड़ी, एनसीसी कैडेट, एनएसएस स्वयंसेवक, स्काउट-गाइड और आम नागरिक तक तिरंगा हाथ में लेकर सड़क पर उतर आए।

पुलिस ग्राउंड से अग्रसेन चौक तक निकली तिरंगा रैली में करीब 700 लोगों की सहभागिता ने शहर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन के शीर्ष अधिकारी केवल मंच या कार्यालय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खुद तिरंगा थामकर लोगों के साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए। राष्ट्रध्वज की शान में प्रशासनिक औपचारिकताएं पीछे छूट गईं और सामने था केवल एक भाव—राष्ट्र सर्वोपरि।

जब कलेक्टर-एसएसपी खुद सड़क पर उतरे

रैली में कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल सहित पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उनके साथ पुलिस जवान, एनसीसी कैडेट, एनएसएस स्वयंसेवक और स्काउट-गाइड के विद्यार्थी भी तिरंगा लेकर चले।

यह दृश्य इसलिए भी खास रहा क्योंकि आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारी किसी आयोजन का नेतृत्व मंच से करते नजर आते हैं, लेकिन यहां अधिकारी खुद जनता और युवाओं के बीच सड़क पर दिखाई दिए। इससे रैली केवल सरकारी आयोजन नहीं रही, बल्कि जनभागीदारी का रूप लेती चली गई।

बहतराई से जिला कार्यालय तक, एक ही कहानी

इसी दिन बहतराई स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भी खिलाड़ियों ने तिरंगा यात्रा निकालकर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। खिलाड़ियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया।

खेल के मैदान से लेकर शहर की सड़कों तक तिरंगे की यह यात्रा एक ही भाव को सामने ला रही थी—युवा ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम का मेल।

कार्यालय में हस्ताक्षर, सड़क पर तिरंगा

राष्ट्रभक्ति का यह सिलसिला केवल रैली तक सीमित नहीं रहा। जिला कार्यालय परिसर में कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने संयुक्त रूप से वंदे मातरम् और हर घर तिरंगा अभियान के हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। दोनों अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए और सेल्फी लेकर अभियान में जनभागीदारी का संदेश दिया।

जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, जिला कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि और जनदर्शन में पहुंचे नागरिकों ने भी हस्ताक्षर कर अभियान में सहभागिता दर्ज कराई।

यानी एक तरफ कार्यालय में हस्ताक्षर से संकल्प दर्ज हुआ तो दूसरी तरफ सड़क पर तिरंगा लेकर उस संकल्प की तस्वीर दिखाई दी।

700 कदमों ने बनाया शहर का माहौल

पुलिस ग्राउंड से अग्रसेन चौक तक निकली रैली में करीब 700 प्रतिभागियों की मौजूदगी ने शहर के वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। हाथों में तिरंगा, साथ चलते विद्यार्थी, अनुशासित पुलिस जवान और उत्साहित युवा—पूरी रैली में राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान का भाव दिखाई दिया।

एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड की भागीदारी ने इसे और व्यापक बनाया। रैली के समन्वय में एनसीसी कैप्टन आशीष शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह की विशेष भूमिका रही।

तिरंगा यात्रा से आगे—जनभागीदारी का संदेश

‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य केवल घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना नहीं, बल्कि तिरंगे के प्रति सम्मान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रमों ने इसी भावना को सड़क, कार्यालय और खेल परिसर तक पहुंचाया।

खास बात यह रही कि प्रशासन, पुलिस, खिलाड़ी, विद्यार्थी, स्वयंसेवक और आम नागरिक एक ही पंक्ति में दिखाई दिए। पद अलग थे, जिम्मेदारियां अलग थीं, लेकिन हाथों में लहराता तिरंगा सबको एक सूत्र में बांध रहा था।

न्यायधानी की तस्वीर ने जीता दिल

स्वतंत्रता दिवस से पहले बिलासपुर की यह तस्वीर इसलिए याद रखी जाएगी कि यहां राष्ट्रध्वज केवल किसी सरकारी भवन पर नहीं लहराया, बल्कि कलेक्टर से लेकर पुलिस जवान, खिलाड़ी से लेकर विद्यार्थी और अधिकारी से लेकर आम नागरिक तक हर हाथ में दिखाई दिया।

न्यायधानी ने अपने अंदाज में बता दिया कि तिरंगा किसी एक वर्ग, संस्था या विभाग का नहीं—हर भारतीय की आन, बान और शान है। और मंगलवार को बिलासपुर की सड़कों पर उठे ये 700 कदम शायद इसी भावना का सबसे खूबसूरत संदेश थे—तिरंगा ऊपर है, बाकी सब उसके नीचे एक हैं।