अज्ञान से आत्मविश्वास तक: ‘उल्लास’ में 40 हजार से ज्यादा लोगों ने लिखी नई शुरुआत
जेल से गांव तक एक ही जज्बा—पढ़ना है, आगे बढ़ना है”

बिलासपुर… जिले में ‘उल्लास’ योजना के तहत आयोजित साक्षरता आकलन परीक्षा ने जनभागीदारी का नया अध्याय लिख दिया। 961 परीक्षा केंद्रों—चारों विकासखंडों से लेकर केंद्रीय जेल तक में 40,777 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ परीक्षा दी। इसमें 10,943 पुरुष और 29,822 महिलाओं की भागीदारी रही, जहां महिलाओं की संख्या और उनकी सक्रिय उपस्थिति इस अभियान की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी।
परीक्षा का आयोजन शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से किया गया। ‘उल्लास’ केंद्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को पढ़ना-लिखना, आधारभूत गणित, डिजिटल साक्षरता और जीवनोपयोगी ज्ञान सिखाया गया, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इसे समाज में बढ़ती जागरूकता और परिवर्तन का संकेत बताया और कहा कि बिलासपुर को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में यह बड़ी प्रगति है।

इस अभियान की सबसे भावुक और प्रेरक तस्वीरें परीक्षा केंद्रों पर दिखीं—कहीं सास-बहू साथ बैठकर परीक्षा देती नजर आईं, तो कहीं तीन पीढ़ियां एक साथ कापी-कलम लेकर भविष्य लिखती दिखीं। बुजुर्ग दंपति, नवविवाहित जोड़े, दिव्यांगजन और छोटे बच्चों को साथ लेकर परीक्षा देने पहुंचीं माताओं ने इस पहल को सामाजिक उत्सव का रूप दे दिया। केंद्रीय जेल बिलासपुर में भी 100 पुरुष और 33 महिला बंदियों ने भाग लेकर साक्षरता की राह पकड़ी, वहीं कोटा विकासखंड के आदिवासी अंचलों से भी बड़ी संख्या में सहभागिता दर्ज की गई।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार ‘उल्लास’ योजना के प्रभाव से जिले की साक्षरता दर में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं। इस दौरान केंद्राध्यक्ष, पर्यवेक्षक, समन्वय समितियां, विशेष ऑब्जर्वर और निरीक्षण दल लगातार सक्रिय रहे। ग्राम स्तर पर सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, आजीविका मिशन की दीदियों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित की गई।






