रायपुर…छत्तीसगढ़ भाजपा में लंबे समय से खाली पड़े प्रदेश प्रभारी के पद पर नई नियुक्ति हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने 23 सितंबर को जारी सूची में राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ शंभू को सहप्रभारी बनाया है। इसके साथ ही प्रदेश भाजपा में केंद्रीय संगठन की नई निगरानी व्यवस्था तय हो गई है।

यह बदलाव केवल पदों की अदला-बदली नहीं है। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी और सहप्रभारी की नियुक्ति को आने वाले दौर की संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि नियुक्ति आदेश में चुनावी रणनीति को लेकर कोई अलग उल्लेख नहीं किया गया है।

स्मृति ईरानी के हाथ प्रदेश की जिम्मेदारी

स्मृति ईरानी भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री हैं। राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभार दिया गया है। उनके जिम्मे हरियाणा का प्रभार भी रहेगा। छत्तीसगढ़ में उनकी भूमिका प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय के साथ संगठन की गतिविधियों की समीक्षा में महत्वपूर्ण होगी।

स्मृति ईरानी की नियुक्ति के साथ छत्तीसगढ़ भाजपा को एक ऐसा प्रभारी मिला है, जिसकी पहचान राष्ट्रीय राजनीति में भी मजबूत है। ऐसे में प्रदेश के संगठनात्मक मामलों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की नजर और सक्रियता बढ़ने की संभावना है।

सिद्धार्थ शंभू भी सीधे राष्ट्रीय संगठन से जुड़े

स्मृति ईरानी के साथ सिद्धार्थ शंभू को सहप्रभारी बनाना भी महत्वपूर्ण है। शंभू भाजपा के राष्ट्रीय सचिव हैं और अब छत्तीसगढ़ में प्रभारी के साथ संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालेंगे। यानी प्रदेश भाजपा के नए प्रभारी-सहप्रभारी दोनों राष्ट्रीय टीम से सीधे जुड़े हुए हैं।

इससे प्रदेश संगठन में राष्ट्रीय नेतृत्व की भागीदारी का एक नया ढांचा तैयार हुआ है। आने वाले समय में प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ प्रभारी-सहप्रभारी की भूमिका भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगी।

नितिन नबीन के बाद बदली व्यवस्था

नितिन नबीन के भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में प्रदेश प्रभारी का पद खाली था। अब स्मृति ईरानी की नियुक्ति के साथ वह रिक्तता खत्म हो गई है। नबीन का छत्तीसगढ़ से पुराना संगठनात्मक जुड़ाव रहा है। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश के लिए नई व्यवस्था का इंतजार था।

अब नई टीम के सामने छत्तीसगढ़ के संगठन को समझने, प्रदेश के राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों की समीक्षा करने तथा संगठन को चुनावी वर्ष से पहले लगातार सक्रिय रखने की जिम्मेदारी होगी।

2028 की जमीन अभी से तैयार

अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। इसलिए नई नियुक्तियों का सबसे बड़ा असर आने वाले दो वर्षों की संगठनात्मक गतिविधियों में दिखाई दे सकता है। बूथ और मंडल स्तर की सक्रियता, जिला संगठनों की समीक्षा, सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा कार्यकर्ताओं के बीच केंद्रीय नेतृत्व की पकड़ मजबूत करना नई टीम के सामने प्रमुख विषय रहेंगे।

प्रदेश भाजपा में अब स्मृति ईरानी, सिद्धार्थ शंभू, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बीच समन्वय आने वाले समय में खास तौर पर देखा जाएगा। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की भूमिका भी छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

यानी 2028 की चुनावी तस्वीर अभी दूर है, लेकिन भाजपा ने छत्तीसगढ़ के संगठन की अगली पारी के लिए अपनी नई केंद्रीय निगरानी व्यवस्था तय कर दी है। अब असली नजर इस पर रहेगी कि स्मृति ईरानी और सिद्धार्थ शंभू प्रदेश संगठन को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।