Dharmendra Pradhan resign,CJP protest।शिक्षा मंत्री ने शनिवार दोपहर पद से इस्तीफा दे दिया।देर शाम सरकार ने सीजेपी की सभी तीन मांगे मांग ली है।इधर मंत्री के इस्तीफे पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक्स पोस्ट किया है।

Dharmendra Pradhan resign।श्री साय ने कहा कि माननीय श्री धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक दायित्व का निर्वहन सदैव निष्ठा, ईमानदारी और पूर्ण समर्पण के साथ किया है।यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों के दौरान केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के विस्तार तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के सृजन में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने पद से त्यागपत्र देने का उनका निर्णय सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों, मर्यादा और सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है।

राष्ट्रसेवा के उनके सतत प्रयास निरंतर नई ऊँचाइयों को प्राप्त करते रहें। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।

इधर दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान सरकार से बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के नेशनल स्पोक्सपर्सन आशुतोष रांका ने कहा, “हमने सरकारी डेलीगेशन के साथ 3 राउंड की बातचीत की। जंतर-मंतर पर हमारा प्रोटेस्ट, जो कई दिनों से चल रहा था, उसकी तीन मेन डिमांड थीं: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रोटेस्टर्स और ऑर्गेनाइजर्स के खिलाफ फाइल किए गए सभी लीगल केस, वो FIR वापस ली जाएं और प्रोटेस्टर्स या ऑर्गेनाइजर्स के खिलाफ भविष्य में कोई केस फाइल न किया जाए। हमारी तीसरी डिमांड थी कि NEET पेपर न होने के बाद जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया, उन्हें 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। अभी कुछ देर पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है। इसका मतलब है कि हमारी पहली डिमांड मान ली गई है।”इसके अलावा सरकार ने सीजेपी की सभी डिमांड मान ली है।

सरकार से बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी(CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, “हमारी दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR, सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि सभी भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी राज्यों में, वापस ली जाएं। यह भी हमारी दूसरी मांग थी। सरकार ने वह मांग भी मान ली है। इसके अलावा, जल्द ही FIR वापस ले ली जाएंगी। सरकार ने हमें भरोसा दिलाया है कि वह दर्ज सभी FIR की कॉपी शेयर करेगी, हमारी पिछली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 15 से 20 FIR दर्ज की गई थीं। हमें वे कॉपी किसी भी हाल में तीन से चार दिनों में मिल जाएंगी। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जल्द ही FIR वापस ले ली जाएंगी… यह समझते हुए हमने सरकार के साथ एक ड्राफ्ट शेयर किया है जो एक लिखित गारंटी है। सरकार ने कहा है कि वह इसे मंगलवार तक हमारे साथ शेयर करेगी। हमें उम्मीद है कि मंगलवार तक हमें इन FIR और भविष्य की किसी भी कार्रवाई के बारे में सरकार की गारंटी मिल जाएगी।”

बता दे कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के 37 दिन बाद भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा- जंतर मंतर पर जो स्थिति बनी हुई है. इससे देश की एकता और अखंडता को खतरा है. उन्होंने आगे कहा कि युवाओं का भविष्य न बर्बाद हो और वे कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, इसे देखते हुए मैंने त्यागपत्र देने का फैसला किया है.

मोदी सरकार के 12 साल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध-प्रदर्शन के दबाव में इस्तीफा देना पड़ा है.प्रधान को मोदी कैबिनेट में मजबूत मंत्री माना जाता था. 2014 से प्रधान सरकार में मंत्री थे. शिक्षा से पहले प्रधान पेट्रोलियम और इस्पात जैसे अहम विभागों के मंत्री थे. हालांकि, नीट पेपर लीक विवाद के बाद कैबिनेट में उनकी स्थिति कमजोर हुई और आखिर में उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी है.

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों हुआ? 1. छात्र और विपक्ष अड़ गए थे- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ गई थी. शुक्रवार को सीजेपी की तरफ से सौरव दास और आशुतोष रांका केंद्र सरकार के मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से बातचीत के लिए पहुंचे थे. दोनों ने यह साफ कर दिया कि प्रदर्शन तभी खत्म होगा, जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा.

इधर, विपक्ष ने भी धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. शनिवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ 10 जनपथ के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा से कोई समझौता नहीं होगा. सरकार जब तक इस्तीफा नहीं लेती है, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होने वाला है.

2. सदन से सड़क तक बवाल- सड़क और संसद दोनों जगहों पर विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहा था. संसद की कार्यवाही 20 जुलाई से शुरू हुई थी, लेकिन पिछले 5 दिनों में एक दिन भी संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पाई. धर्मेंद्र प्रधान के मसले पर हर दिन हंगामा हुआ, जिसके कारण राज्यसभा और लोकसभा दोनों ठप रहा.

वहीं जनता के बीच भी आक्रोश लगातार बढ़ रहा था. दिल्ली से यह विरोध प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहा था. बिहार में शनिवार को पटना, सीवान जैसे बड़े शहरों में बवाल देखा गया. महाराष्ट्र और यूपी में भी छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है.

इन सभी राज्यों में बीजेपी की सरकार है. ऐसे में केंद्र सरकार कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थी.

3. डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाए- 3 मई को नीट का पेपर लीक हुआ था. इस विवाद को धर्मेंद्र प्रधान ठीक से संभाल नहीं पाए. शुरुआत में सरकार के स्तर पर विरोध-प्रदर्शन को इग्नोर किया गया. बाद में जब बवाल बढ़ा तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डैमेज कंट्रोल के लिए आगे आना पड़ा. मोदी ने सख्त कानून बनाने की घोषणा की. उन्होंने वीडियो बनाकर छात्रों से अपील की.

वहीं पूरे मामले में धर्मेंद्र प्रधान का कोई बयान नहीं आया. इस पूरे बवाल में वे छात्रों से पूरी तरह से कट गए थे, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है.

4. अड़ियल रवैया, छात्रों से कटे- मोदी कैबिनेट में यह पहली बार है, जब किसी मंत्री को विरोध के बाद हटाया गया है. 12 साल में पहली बार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ है. प्रधान के इस्तीफे का एक कारण उनका अड़ियल रवैया भी है. नीट पेपर लीक के बाद प्रधान ने छात्र नेताओं से कोई बात नहीं की.

वहीं फरवरी 2025 में जब चंडीगढ़ में किसानों ने बड़े प्रदर्शन की घोषणा की तो खुद उस वक्त केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी टीम को लेकर चंडीगढ़ पहुंच गए. उन्होंने वहां बातचीत के जरिए पूरे विवाद को सुलझा दिया.

5. लापरवाही का आरोप- 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था. उस वक्त भी धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री थे. सरकार ने पेपर लीक की घोषणा की. इसरो के वैज्ञानिक राधाकृष्णन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई. कमेटी का काम सुझाव देना था, जिससे पेपर लीक को रोका जा सके.

राधाकृष्णन कमेटी ने पेपर लीक रोकने के लिए अपना सुझाव दे दिया, लेकिन इसे पूर्ण रूप से अमल में नहीं लाया गया. इसके अलावा एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की लापरवाही का ठीकरा भी प्रधान पर फूटा. आखिर में उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके ने कहा, “यह छात्रों के लिए बहुत अच्छी बात है. सरकार ने उनकी मांगें सुन ली हैं. मैं धर्मेंद्र प्रधान को भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने अपना इस्तीफा देकर उदारता और बड़ा दिल दिखाया.”

रिपोर्ट के अनुसार अभिजीत दीपके के माता-पिता प्रधान के इस्तीफे के बाद खुशी से रो पड़े. 6 जून के बाद पहली बार अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके और उनकी मां अनीता दीपके को राहत महसूस हुई. अनीता ने कहा, यह बहुत अच्छा है. ढाई महीने से छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए लड़ रहे थे. यह जीत है.

भगवान शंकर और अनीता, जो औरंगाबाद में रहते हैं, जिसे अब छत्रपति संभाजीनगर कहा जाता है, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता हैं, जिन्होंने भारत के सबसे बड़े स्टूडेंट प्रोटेस्ट में से एक को लीड किया था. अनीता ने कहा, अभिजीत ने सब्र से लड़ाई लड़ी है. उसे थप्पड़ मारे गए और बुरा-भला कहा गया। उसने इतनी कम उम्र में इतना कुछ हासिल कर लिया है.