बिलासपुर…बाढ़ आए या पानी में कोई डूबने लगे, ऐसे समय में मदद के लिए दूर से बचाव दल आने का इंतजार न करना पड़े। इसी उद्देश्य से बिलासपुर जिले में 57 जल मित्रों की टीम तैयार की जा रही है। इनमें कोटवार, मछुआरे, गोताखोर और कुशल तैराक शामिल हैं। इन्हें पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, मोटर बोट चलाने और बचाव के जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जिला प्रशासन की इस पहल का मकसद बाढ़ और जलभराव जैसी आपात स्थिति में स्थानीय स्तर पर ही मदद उपलब्ध कराना है, ताकि समय रहते लोगों तक पहुंचकर उनकी जान बचाई जा सके। इसके लिए जिले के अलग-अलग अनुभागों और तहसीलों से 57 लोगों का चयन किया गया है।

परसदा स्थित अग्निशमन, आपातकालीन सेवाएं, एसडीआरएफ प्रशिक्षण केंद्र में 26 से 30 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है। इसमें प्रतिभागियों को केवल बचाव के तरीके बताए ही नहीं जा रहे, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जा रहा है।

फंसे लोगों को निकालने के सीख रहे तरीके

प्रशिक्षण के दौरान मोटर बोट चलाने, पानी में डूबते लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और तैराकी की अलग-अलग तकनीकों का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके साथ ही लाइफ जैकेट और लाइफ ब्वॉय का सही इस्तेमाल तथा राहत-बचाव में काम आने वाले उपकरणों की जानकारी भी दी जा रही है।

बाढ़ के समय स्थानीय लोगों को पानी और आसपास के रास्तों की जानकारी होने का लाभ बचाव कार्य में मिल सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित जल मित्र जरूरत पड़ने पर शुरुआती मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

आपदा के समय स्थानीय स्तर पर मदद

जल मित्रों को तैयार करने के पीछे उद्देश्य यह है कि बाढ़ जैसी स्थिति में बचाव कार्य शुरू करने में देरी कम हो और जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सके। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये लोग आपात परिस्थितियों में बचाव कार्य में सहयोग कर सकेंगे। इससे जिले की आपदा से निपटने की तैयारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।