बिलासपुर… शादी-विवाह के नियम एक जैसे हों या अलग-अलग परंपराओं के अनुसार चलें? तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति में अधिकारों को लेकर क्या सभी के लिए समान कानून होना चाहिए? लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर कानून का स्वरूप कैसा हो? छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने की कवायद के बीच बिलासपुर में इन सवालों पर खुलकर विचार रखे गए। आठ जिलों से आए सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने पक्ष में तर्क दिए और कई संवेदनशील मुद्दों पर सुझाव रखे।

देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में बुधवार को हुई संभाग स्तरीय परामर्श बैठक का उद्देश्य केवल समान नागरिक संहिता की जानकारी देना नहीं, बल्कि अलग-अलग वर्गों की राय जानना भी था। विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। बैठक में पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर से विचार सामने आए। अब इन सुझावों के अध्ययन के बाद समिति संहिता का प्रारूप तैयार करेगी।

पूजा-पद्धति नहीं, पारिवारिक कानूनों पर विचार

समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य पारिवारिक मामलों में समानता को बढ़ावा देना और महिलाओं तथा बच्चों के अधिकारों को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पारिवारिक विषयों से जुड़े दो दर्जन से अधिक कानून और प्रावधान प्रचलित हैं, जिनमें कई तरह की भिन्नताएं हैं।

सिंह ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता का संबंध विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक मामलों से है। उनके मुताबिक, किसी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समिति विभिन्न वर्गों से मिलने वाले सुझावों और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर प्रारूप तैयार करेगी।

परंपराओं और बदलाव पर विमर्श

बैठक में बिलासपुर के अलावा मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्रतिनिधि शामिल हुए। सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक संगठनों, शिक्षाविदों और अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। चर्चा में पारंपरिक मान्यताओं, अलग-अलग समुदायों की प्रथाओं और कानूनी सुधारों से जुड़े पहलुओं पर विचार हुआ।

समिति के सदस्यों ने कहा कि सुझावों को अध्ययन में शामिल किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में मौजूदा कानूनी व्यवस्था के साथ दूसरे राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद समिति राज्य शासन को प्रारूप के साथ जरूरी विधायी और प्रशासनिक अनुशंसाएं सौंपेगी।

30 अक्टूबर तक जनता भी देगी राय

समान नागरिक संहिता को लेकर अपनी बात रखने के लिए अब केवल बैठकों तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। आम नागरिक और संगठन 30 अक्टूबर तक ऑनलाइन भी सुझाव भेज सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in और ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in उपलब्ध हैं।

बैठक में समिति के सदस्य एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्याम धावड़े और बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। स्वागत उद्बोधन संभागायुक्त सुनील जैन ने दिया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ सक्सेना ने किया और आभार एडीएम शिवकुमार बनर्जी ने व्यक्त किया।