बिलासपुर…छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने वर्ष 2026 में न्यायिक कार्यप्रणाली के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के नेतृत्व और सतत निगरानी में उच्च न्यायालय ने न केवल नए मामलों का तेजी से निपटारा किया, बल्कि पुराने लंबित प्रकरणों को भी रिकॉर्ड गति से समाप्त कर लंबित मामलों की संख्या में ऐतिहासिक कमी दर्ज की है। न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और समयबद्ध बनाने की दिशा में यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में 75,667 मामले लंबित थे। इसके बाद 27 जुलाई 2026 तक 30,831 नए मामले दर्ज हुए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाकर 32,747 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। परिणामस्वरूप लंबित मामलों की संख्या घटकर 73,751 रह गई। यानी नए मामलों की तुलना में अधिक पुराने मामलों का निपटारा कर न्यायालय ने 106.21 प्रतिशत की निस्तारण दर हासिल की और लंबित मामलों में 2.53 प्रतिशत की शुद्ध कमी दर्ज की।

उच्च न्यायालय के अनुसार, यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रीष्मावकाश के दौरान सामान्यतः लंबित मामलों की संख्या बढ़ जाती है। इसके बावजूद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने स्वयं अधिक संख्या में मामलों की सुनवाई कर न्यायिक कार्यों में तेजी लाई। 1 जुलाई से 27 जुलाई 2026 के बीच केवल 19 कार्य दिवसों में उन्होंने 2,111 मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण किया।

उच्च न्यायालय का मानना है कि यह सफलता केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों और न्यायालयीन कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। इन प्रयासों से न्यायिक व्यवस्था की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और आम नागरिकों को त्वरित, प्रभावी एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।

न्यायिक जानकारों के अनुसार, नए मामलों से अधिक पुराने मामलों का निपटारा किसी भी न्यायालय के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इससे लंबित प्रकरणों का बोझ घटता है और न्याय वितरण प्रणाली पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होता है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की यह उपलब्धि देश के अन्य न्यायालयों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।