बिलासपुर/रतनपुर.. दोस्तों को चारपहिया वाहन में घूमते देखकर खुद भी ऐसी ही गाड़ी में घूमने की चाहत एक किशोर पर इस कदर हावी हुई कि उसने अपने ही अपहरण की कहानी गढ़ डाली। घर से गायब होकर दोस्त के यहां छिप गया और फिर माता-पिता को फोन कर बताया कि उसका अपहरण हो गया है। अचानक मिली इस सूचना से परिवार में हड़कंप मच गया। घबराए परिजन तत्काल रतनपुर थाने पहुंचे। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल तलाश शुरू की और कुछ ही समय में किशोर को उसके दोस्त के घर से सकुशल बरामद कर लिया।

मामला रतनपुर थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाला 11वीं कक्षा का छात्र अपने दोस्तों को चारपहिया वाहनों में घूमते देखकर खुद भी ऐसी गाड़ी चाहता था। उसने माता-पिता के सामने अपनी इच्छा जाहिर की, लेकिन परिजनों ने उसकी उम्र और पढ़ाई को देखते हुए उसे समझाया। अपनी जिद पूरी नहीं होने पर किशोर ने माता-पिता पर दबाव बनाने का अजीब तरीका निकाल लिया। वह घर से निकलकर दोस्त के यहां छिप गया और फिर फोन कर अपने अपहरण की सूचना दे दी।

सूचना मिलते ही रतनपुर पुलिस ने बिना देर किए खोजबीन शुरू की। थाना प्रभारी नीलेश पांडे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों पर तलाश की और किशोर को उसके दोस्त के घर से ढूंढ निकाला। इसके बाद माता-पिता को थाने बुलाकर बच्चे और परिवार से बातचीत की गई। पुलिस ने किशोर को समझाया कि दोस्तों की देखा-देखी महंगी चीजों की जिद करना और उसे हासिल करने के लिए इस तरह का कदम उठाना उचित नहीं है। उसके इस कदम से माता-पिता को कितनी मानसिक परेशानी हुई, इसका भी अहसास कराया गया।

इस पूरे मामले में पुलिस ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए केवल बच्चे को बरामद करने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी। उसकी काउंसलिंग की व्यवस्था की गई और माता-पिता को भी समझाइश दी गई। इसके बाद किशोर को सुरक्षित उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

थाना प्रभारी नीलेश पांडे ने बताया कि इस उम्र में बच्चों के मन में दूसरों को देखकर वैसी ही चीजें पाने की इच्छा पैदा होना स्वाभाविक है, यह समय बहुत ही नाजुक होता है | बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से बचना होगा. इसके लिए गलत रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। बहरहाल बच्चे को समझाइश दी गई है और उसे परिवार के हवाले कर दिया गया है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह ने बताया कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। उसने अपनी गलती स्वीकार की है। उसे समझाया गया है कि माता-पिता उसकी जरूरतों और भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं। बच्चों को ऐसी गतिविधियों में पड़ने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और जीवन में काबिल बनकर अपनी इच्छाएं पूरी करने का लक्ष्य रखना चाहिए।