cgpsc scam/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाई कोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया धनशोधन के अपराध में उनकी संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं। ऐसे में धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत जमानत देने की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं।

सोनवानी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत नियमित जमानत मांगी थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने याचिका का विरोध किया। इससे पहले रायपुर की विशेष अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट में भी राहत नहीं मिलने से फिलहाल उनकी न्यायिक राहत की उम्मीदों को झटका लगा है।

यह मामला CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष के पद और प्रभाव का इस्तेमाल कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। मामले में रिश्तेदारों के चयन, कथित रिश्वतखोरी और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने जैसे आरोप भी शामिल हैं।

सीबीआई की जांच के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में फायदा पहुंचाने के लिए कथित तौर पर पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी ने सोनवानी पर अपने रिश्तेदारों और एक कारोबारी के परिजनों के चयन में मदद करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है।

मामले में कारोबारी श्रवण कुमार गोयल का नाम भी सामने आया है। वह बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक बताए गए हैं। सीबीआई का आरोप है कि गोयल ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित कराने के उद्देश्य से कथित तौर पर 45 लाख रुपये दिए थे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रकम ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से दो किस्तों में दी गई थी। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि सोनवानी के परिजन इस समिति से जुड़े हुए थे। इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होना अभी बाकी है।

CGPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों की सूची पेश करते हुए आरोप लगाया था कि कुछ चयनित उम्मीदवारों के संबंध नेताओं, अधिकारियों और प्रभावशाली कारोबारियों से हैं। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।

वर्ष 2021 की परीक्षा के परिणाम आने के बाद चयनित अभ्यर्थियों के रिश्तों और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर विवाद बढ़ा। इसके बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भी मामले की जांच की। बाद में राज्य शासन के संदर्भ पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली।

सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि CGPSC-2021 की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले पहुंचाए गए थे। जांच एजेंसी ने सोनवानी के भतीजों और कारोबारी के परिजनों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने की साजिश का आरोप भी लगाया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में परिवार और रिश्तेदारों से संबंधित प्रावधानों में बदलाव कर कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले में आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक से जुड़े अधिकारी सहित अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।