बिलासपुर.. साइबर ठगी के मामलों में अब पुलिस की प्राथमिकता केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। ठगी का शिकार हुए लोगों की रकम जल्द से जल्द वापस दिलाना, निर्दोष लोगों के फ्रीज बैंक खातों को खुलवाना और साइबर अपराधियों की संपत्ति तक पहुंचकर कानूनी कार्रवाई करना अब जांच का अहम हिस्सा होगा। इसी उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में साइबर अपराधों की जांच और ठगी की रकम वापसी की प्रक्रिया को लेकर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण में पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल मौजूद रहे। रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारियों और संबंधित अधिकारियों को साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को त्वरित राहत पहुंचाने की प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई।

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पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने कहा कि किसी बैंक खाते के धारक या निचले स्तर के आरोपी को गिरफ्तार कर लेना ही सफलता नहीं है। वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब ठगी की गई राशि कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पीड़ित के खाते में वापस पहुंच जाए।

प्रशिक्षण में भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के दो महत्वपूर्ण मॉड्यूल की जानकारी दी गई। पहले मॉड्यूल के माध्यम से यह बताया गया कि यदि ठगी की रकम किसी बैंक खाते में फ्रीज कर दी गई है तो बैंक और न्यायालय के समन्वय से उसे पीड़ित के खाते में वापस कैसे कराया जाए। दूसरे मॉड्यूल में उन मामलों की प्रक्रिया समझाई गई, जिनमें जांच के दौरान निर्दोष व्यापारियों या आम नागरिकों के बैंक खाते फ्रीज हो जाते हैं। ऐसे खातों को अनावश्यक रूप से थानों के चक्कर लगाए बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा संचालित कराने की जानकारी भी अधिकारियों को दी गई।

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बैठक में बताया गया कि बिलासपुर की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट अब तक दो लाख 36 हजार रुपये की ठगी की राशि पीड़ितों को वापस दिला चुकी है, जबकि 60 प्रकरणों में रकम वापसी की प्रक्रिया जारी है। इस उपलब्धि पर पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने यूनिट के प्रभारी गोपाल सतपथी और उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।

प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल ने हाल ही में सफलतापूर्वक पूरी की गई रकम वापसी की एक कार्रवाई को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया अधिकारियों को समझाई। वहीं निजी बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने बताया कि ठगी की रकम वापस कराने के लिए बैंकों को किन कानूनी दस्तावेजों और न्यायालय के आदेशों की आवश्यकता होती है।

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बैठक में यह भी तय किया गया कि साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी चल और अचल संपत्तियों का भी रिकॉर्ड तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि मुकदमे के दौरान वे संपत्ति बेचकर कानूनी कार्रवाई से बच न सकें। आवश्यकता पड़ने पर ऐसी संपत्तियों को कुर्क कराने की कार्रवाई भी की जाएगी, जिससे पीड़ितों के नुकसान की भरपाई संभव हो सके।

वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर ठगी का शिकार कोई भी व्यक्ति शिकायत लेकर पहुंचे तो उसे एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनकी शिकायत पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि साइबर ठगी की स्थिति में बिना देरी किए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि रकम को समय रहते रोका और वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।