बिलासपुर…परीक्षा के पहले ही दिन व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आई। मस्तूरी स्थित आत्मानंद स्कूल में कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली परीक्षा करीब 40 मिनट देरी से शुरू हुई, जिससे परीक्षा कक्षों में बैठे छात्र-छात्राओं के बीच भारी तनाव की स्थिति बन गई।

न समय पर उत्तरपुस्तिका, न प्रश्नपत्र

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नियम के अनुसार परीक्षा शुरू होने से पहले 7:30 बजे तक उत्तरपुस्तिका वितरित कर दी जानी चाहिए थी, ताकि छात्र रोल नंबर आदि भर सकें। लेकिन यहां छात्र समय पर कक्षाओं में बैठ तो गए, पर न उत्तरपुस्तिका मिली और न ही प्रश्नपत्र। करीब 30-40 मिनट तक छात्र इंतजार करते रहे, जिसके बाद प्रश्नपत्र वितरण शुरू हुआ और परीक्षा देरी से प्रारंभ हुई।

दोनों कक्षाओं के छात्र प्रभावित

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इस अव्यवस्था का असर केवल 9वीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 11वीं के छात्र भी इसी स्थिति से जूझते नजर आए। परीक्षा के पहले दिन ही दोनों कक्षाओं के विद्यार्थियों को असमंजस और दबाव के बीच परीक्षा देनी पड़ी।

प्राचार्य का बयान—पहला दिन, इसलिए गड़बड़ी

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आत्मानंद स्कूल मस्तूरी के प्राचार्य जयप्रकाश ओझा ने पहले देरी से इनकार किया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि परीक्षा पहले दिन होने के कारण व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाईं। उन्होंने कहा कि जितनी देर से पेपर वितरित किया गया, उतनी ही देर से उत्तरपुस्तिकाएं जमा कराई जाएंगी। हालांकि, यह भी सामने आया कि उन्हें पहले दिन के प्रश्नपत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं थी।

जिला शिक्षा विभाग की अनभिज्ञता ने बढ़ाए सवाल

पूरे मामले में जिला शिक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने कहा कि उन्हें इस देरी की जानकारी नहीं है और वे तत्काल इसकी जानकारी लेकर स्थिति स्पष्ट करेंगे। यह स्थिति बताती है कि जिला स्तर पर परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की मॉनिटरिंग कितनी कमजोर है।

देरी पर उठे गंभीर सवाल

जानकारी देते चलें कि हाल ही में रायपुर में प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों के चलते परीक्षाएं निरस्त करनी पड़ी थीं। ऐसे में मस्तूरी में 40 मिनट की देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर किसी बड़ी गड़बड़ी को छुपाने की कोशिश?

पहले दिन ही बिगड़ी परीक्षा की शुरुआत

जिस दिन छात्रों को अपने भविष्य की परीक्षा की शुरुआत करनी थी, उसी दिन उन्हें अव्यवस्था, इंतजार और असमंजस का सामना करना पड़ा। पहले दिन की यह चूक न सिर्फ छात्रों के मनोबल पर असर डालती है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

यह केवल “पहले दिन की गड़बड़ी” नहीं, बल्कि सिस्टम की तैयारी और जवाबदेही की परीक्षा भी है। अब देखना होगा कि जिला शिक्षा विभाग इस मामले में ठोस कार्रवाई करता है या इसे भी औपचारिक जांच में सीमित कर दिया जाएगा।