रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)…नगर पालिका क्षेत्र के रिंग रोड स्थित शासकीय गौशाला एवं कांजी हाउस की जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मां शारदा बाल निकेतन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम शिकायत की गई थी। लेकिन इस शिकायत ने तब नया सवाल खड़ा कर दिया, जब शिकायतकर्ता के रूप में दर्ज भाजपा रामानुजगंज मंडल अध्यक्ष सीताराम गुप्ता ने तहसीलदार के सामने लिखित आवेदन देकर शिकायत को फर्जी बताया और उसे तत्काल निरस्त करने की मांग कर दी।

मुख्यमंत्री कार्यालय से कलेक्टर तक शिकायत

संस्था के व्यवस्थापक प्रमोद कुमार केशरी के मुताबिक, नगर के कुछ लोगों ने भाजपा मंडल अध्यक्ष सीताराम गुप्ता के नाम और लेटर पैड का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री के नाम शिकायत भेजी थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी पत्र दिनांक 17 मई 2026 को कार्रवाई के लिए बलरामपुर कलेक्टर के पास पहुंचा। इसके बाद शिकायत की जांच रामानुजगंज तहसीलदार को सौंपी गई। शिकायत में मां शारदा बाल निकेतन पर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप लगाए गए थे।

मंडल अध्यक्ष बोले- मेरे हस्ताक्षर का दुरुपयोग

जांच के सिलसिले में तहसीलदार ने सीताराम गुप्ता को बुलाया। इस पर उन्होंने 6 अक्टूबर 2026 को लिखित आवेदन प्रस्तुत कर साफ कहा कि प्रकरण में उनके नाम से दर्ज शिकायत उन्होंने नहीं की है। किसी अन्य व्यक्ति ने उनके नाम और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर शिकायत की है। मंडल अध्यक्ष ने शिकायत से अपना कोई संबंध नहीं होने की बात कहते हुए पूरे प्रकरण को निरस्त करने की मांग की। इस घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनके नाम और लेटर पैड का इस्तेमाल किसने किया?

1997 के बेदखली आदेश का रिकॉर्ड भी नहीं मिला

संस्था के व्यवस्थापक प्रमोद कुमार केशरी का कहना है कि खसरा नंबर 67/32 आज भी राजस्व रिकॉर्ड में कांजी हाउस के नाम पर दर्ज है और इस भूमि पर नगर पालिका परिषद रामानुजगंज का कब्जा बरकरार है। वहीं, शिकायत में वर्ष 1997 के तहसीलदार के कथित बेदखली आदेश का उल्लेख किया गया था। इस आदेश की प्रमाणित प्रति हासिल करने के लिए नकल शाखा तहसील कार्यालय रामानुजगंज और मुख्य प्रतिलिपिकार नकल शाखा बलरामपुर में आवेदन दिया गया। व्यवस्थापक के अनुसार, दोनों कार्यालयों ने लिखित जवाब में कहा है कि संबंधित आदेश का कोई दस्तावेज उनके यहां उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उस कथित आदेश की प्रमाणिकता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थायी लीज के लिए दिया आवेदन

प्रमोद कुमार केशरी ने बताया कि मां शारदा बाल निकेतन जिस भूमि पर संचालित है, उसके स्थायी लीज के लिए संबंधित विभाग के पास विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया है। यह आवेदन अभी विचाराधीन है। संस्था प्रबंधन का कहना है कि वह वैध दस्तावेजों के आधार पर संस्था संचालित कर रहा है और सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों से उसकी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है।

फर्जी शिकायत करने वाले की पहचान

संस्था व्यवस्थापक ने मांग की है कि भाजपा मंडल अध्यक्ष के नाम और हस्ताक्षर का कथित तौर पर दुरुपयोग कर शासन-प्रशासन को गुमराह करने वाले व्यक्ति की पहचान की जाए और उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई हो। साथ ही प्रकरण को निरस्त किया जाए। अब इस पूरे मामले में दो अहम सवाल सामने हैं- मंडल अध्यक्ष के नाम से शिकायत किसने की और जिस वर्ष 1997 के आदेश का हवाला दिया जा रहा है, उसका मूल सरकारी रिकॉर्ड आखिर कहां है?