खैरागढ़… महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना में सत्यापन व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई है। खैरागढ़ जिले के मुढ़ीपार गांव में एक पुरुष का आवेदन न केवल स्वीकार हो गया, बल्कि कई महीनों तक उसके खाते में योजना की राशि भी नियमित रूप से जमा होती रही। मामला सामने आने के बाद विभाग ने भुगतान रोकते हुए राशि की वसूली और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

आवेदन में ही छिपा था पूरा राज

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रिकॉर्ड के अनुसार आवेदक का नाम तिलोक साहू दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि आवेदन में पति के नाम वाले कॉलम में भी तिलोक साहू का ही नाम दर्ज किया गया। इसके बावजूद आवेदन आंगनबाड़ी स्तर से लेकर सुपरवाइजर स्तर तक सत्यापित होता चला गया और किसी स्तर पर इस स्पष्ट विसंगति पर ध्यान नहीं दिया गया।

सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल

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मामले ने महतारी वंदन योजना की सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रारंभिक जांच में ही दस्तावेजों और पात्रता का सही मिलान किया जाता, तो आवेदन स्वीकृत होने की नौबत नहीं आती। लेकिन सभी चरण पार करने के बाद भुगतान भी शुरू हो गया, जिससे विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

‘ट्रायल’ बताते रहे आवेदक

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जानकारी के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने विभाग को बताया कि वह कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालित करता है। उसका कहना है कि पोर्टल नया होने के कारण वह केवल आवेदन प्रक्रिया समझने के उद्देश्य से परीक्षण कर रहा था। इसी दौरान आवेदन आगे बढ़ गया और खाते में योजना की राशि जमा होने लगी।

रिकॉर्ड में भी उलझा हिसाब

मामले में एक और विसंगति सामने आई है। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार भुगतान 12 महीनों तक हुआ, जबकि विभागीय कार्रवाई में 10 हजार रुपये की रिकवरी का उल्लेख है। यानी भुगतान अवधि और वसूली की राशि के बीच अंतर भी जांच का विषय बन गया है।

भुगतान रोका, जांच जारी

विभाग ने संबंधित आवेदन को स्थायी रूप से होल्ड पर डाल दिया है। अधिकारियों के अनुसार निर्धारित राशि की रिकवरी कराई जा चुकी है और पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आवेदन और सत्यापन के दौरान चूक किस स्तर पर हुई।