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8th Pay Commission- केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग, पेंशन से लेकर सैलरी तक 9 अहम सुधारों के लिए NC JCM ने लिखा पत्र

NC JCM के स्टाफ पक्ष ने 8वें वेतन आयोग से, अन्य मांगों के साथ-साथ, ज्ञापन जमा करने की प्रक्रिया में सुधार करने का आग्रह किया है. खास बात तो ये है कि स्टाफ पक्ष की की ओर 9 डिमांड लिस्ट भेजी है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर स्टाफ साइड की ओर से कौन कौन सी डिमांड रखी गई है.

8th Pay Commission/दिल्ली: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है।

8th Pay Commission/नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने वेतन आयोग को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर ज्ञापन (Memorandum) जमा करने की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान प्रक्रिया काफी सीमित है और इसमें व्यापक सुधार की जरूरत है ताकि हर वर्ग की आवाज सुनी जा सके।

NC JCM ने प्रक्रिया को बताया ‘सीमित’, समावेशी बनाने की मांग

NC JCM के स्टाफ साइड के सचिव, शिवा गोपाल मिश्रा ने 1 अप्रैल, 2026 की तारीख वाले इस पत्र में 8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन को संबोधित किया है। पत्र में कहा गया है कि ज्ञापन जमा करने के लिए जो डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है, उसकी सीमाओं के कारण कर्मचारी अपनी बात विस्तार से नहीं रख पा रहे हैं। संस्था ने इसे अधिक ‘इंक्लूसिव’ और असरदार बनाने के लिए 9 सूत्रीय मांगें रखी हैं।

ये हैं स्टाफ साइड की 9 प्रमुख मांगें:8th Pay Commission

1. शब्दों की सीमा बढ़ाई जाए: वर्तमान में प्रत्येक विषय के लिए केवल 500 शब्द (3,500 कैरेक्टर्स) की सीमा तय है। कर्मचारियों का तर्क है कि इतने कम शब्दों में जटिल मुद्दों को समझाना संभव नहीं है। इसे बढ़ाकर कम से कम 1,000 शब्द करने की मांग की गई है।

2. पेंशन सुधार (NPS/UPS बनाम OPS): पत्र में सबसे बड़ा मुद्दा पेंशन का उठाया गया है। संस्था ने मांग की है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की कमियों पर चर्चा की जाए और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने पर विचार हो।

3. समय सीमा में विस्तार: ज्ञापन जमा करने की वर्तमान समय सीमा को बढ़ाकर 31 मई, 2026 करने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि विभिन्न यूनियनें अपने कैडर के साथ विस्तृत परामर्श कर सकें।

4. महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान: कार्यस्थल पर सुरक्षा, मैटरनिटी बेनिफिट, मासिक धर्म (Menstrual) कल्याण उपाय और चाइल्ड केयर लीव (CCL) जैसे मुद्दों के लिए एक अलग सेक्शन बनाने का सुझाव दिया गया है।

5. पेंशनर्स के मुद्दों को प्राथमिकता: रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ, पेंशन में समानता, कम्यूटेड वैल्यू की बहाली और अन्य कल्याणकारी उपायों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।

6. तकनीकी बाधाओं को दूर करना: वर्तमान में अटैचमेंट की सीमा केवल 2 MB है, जिसे बढ़ाकर 10 MB करने की मांग की गई है ताकि विस्तृत डेटा और रिपोर्ट अपलोड की जा सकें।

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7. सब-क्वेश्चंस के लिए स्पष्ट प्रारूप: हर विषय के तहत आने वाले उप-प्रश्नों का व्यवस्थित जवाब देने की सुविधा मांगी गई है।

8. विभाग-विशिष्ट समस्याएं: हर सरकारी विभाग की अपनी चुनौतियां होती हैं। पत्र में सुझाव दिया गया है कि ‘डिपार्टमेंट स्पेसिफिक’ मुद्दों को उठाने के लिए अलग प्रावधान होना चाहिए।

9. आवेदन के वैकल्पिक तरीके: ऑनलाइन के साथ-साथ ईमेल और हार्ड कॉपी (Physical copy) के जरिए भी प्रस्ताव जमा करने की अनुमति मांगी गई है ताकि तकनीकी बाधाओं से बचा जा सके।

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह पत्र?

8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशनभोगियों की पेंशन संरचना को अगले 10 सालों के लिए तय करेगा। यदि ज्ञापन जमा करने की प्रक्रिया में सुधार होता है, तो कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को अधिक डेटा और तर्कों के साथ पेश कर पाएंगे। इससे वेतन वृद्धि और पेंशन सुधारों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

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