बिलासपुर…मिनोचा कॉलोनी का कथा पंडाल रविवार को सिर्फ एक आयोजन स्थल नहीं रहा, बल्कि वह आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का जीवंत मंच बन गया। श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा आयोजित नानी बाई का मायरा कथा के अंतिम दिन ऐसा भावनात्मक दृश्य रचा कि श्रद्धालुओं को यह अनुभूति होने लगी—जैसे स्वयं भगवान मायरा लेकर बिलासपुर पधारे हों।

गाजे-बाजे के साथ जब मायरा लेकर प्रेम सेवा परिवार के सदस्य पंडाल में पहुंचे, सिर पर सजी वैवाहिक भात सामग्री, 56 प्रकार के व्यंजन और परंपरागत थालों की शोभा ने वातावरण को वृंदावनमय कर दिया। भक्ति गीतों की लय पर हजारों श्रद्धालु झूम उठे, महिलाएं भावविभोर होकर नाचने लगीं और पूरा पंडाल कृष्णमय हो गया।

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नानी बाई की पीड़ा से प्रभु की करुणा तक

विश्व विख्यात कथा वाचक जया किशोरी ने कथा के माध्यम से नानी बाई के जीवन संघर्ष, सामाजिक उपेक्षा और अंततः प्रभु की कृपा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे निर्धन नरसिंह मेहता के पास मायरा भेजने को कुछ नहीं था, लेकिन जब भरोसा भगवान पर रखा गया, तो स्वयं कृष्ण रुक्मणी संग मायरा लेकर चले।

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कथा में वह क्षण जब नानी बाई नदी किनारे बैठकर तोते से पूछती है—“कौन आ रहा है?” और उत्तर मिलता है—“तुम्हारा भाई”—पूरे पंडाल को भावनाओं से भर गया। रुक्मणी द्वारा नानी बाई को गले लगाने का दृश्य सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

महिला सम्मान का स्पष्ट संदेश

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जया किशोरी ने कथा के दौरान समाज को सीधा संदेश दिया—“दुनिया में सबसे कठिन काम घर चलाना है, और यह काम महिला ही करती है।” उन्होंने कहा कि हर घर की असली धुरी महिला होती है, इसलिए हमारी परंपराओं में ‘नानी’ का स्थान ‘नाना’ से पहले आता है और राधा का नाम कृष्ण से पहले लिया जाता है।

भक्ति के साथ सामाजिक चेतना

कथा के मंच से सिर्फ भक्ति ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी गूंजा। जया किशोरी ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का उल्लेख करते हुए युवाओं से यातायात नियमों का पालन करने, नशे से दूर रहने और नाबालिगों को वाहन न सौंपने की अपील की। श्रद्धालुओं ने इस संदेश को तालियों से स्वीकार किया।

राजनीति से ऊपर दिखा भक्ति भाव

कथा में सत्ता और विपक्ष की रेखाएं स्वतः मिटती नजर आईं। राज्य सरकार के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक, पूर्व विधायक और जनप्रतिनिधि एक साथ आरती में शामिल हुए। किसी मंच पर राजनीतिक भेद नहीं दिखा—सब केवल श्रद्धालु थे।

हजारों श्रद्धालु, एक भाव

तीन दिवसीय आयोजन में 10 से 12 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी रही, जिसमें महिलाओं की संख्या सर्वाधिक रही। राधा-कृष्ण, वृंदावन, खाटू श्याम और होली गीतों पर पंडाल देर रात तक भक्ति रस में डूबा रहा।

आभार और संकल्प

कथा के समापन पर श्री प्रेम सेवा परिवार ने श्रद्धालुओं, प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों का आभार जताते हुए कहा कि भविष्य में भी बिलासपुर को ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से जोड़ते रहेंगे।