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Bilaspur

सेवा नियमों पर हाई कोर्ट की मुहर, अदालतों में कार्यरत कर्मचारियों की नियमित पढ़ाई पर रोक

कोर्ट कर्मचारी बनकर क्लासरूम में हाज़िरी नहीं, हाई कोर्ट ने स्पष्ट की सीमा

बिलासपुर…छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायिक कर्मचारियों की शिक्षा और सेवा शर्तों को लेकर एक स्पष्ट और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने साफ कर दिया है कि अदालतों में पदस्थ कोई भी कर्मचारी नौकरी में रहते हुए नियमित छात्र के रूप में पढ़ाई नहीं कर सकता। अदालत का कहना है कि इस तरह की पढ़ाई न केवल कार्यालयीन कार्यों को प्रभावित करती है, बल्कि न्यायिक प्रशासन के अनुशासन पर भी प्रतिकूल असर डालती है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक कर्मचारी को नियमित छात्र के रूप में एलएलबी की पढ़ाई की अनुमति दिए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए की। डिवीजन बेंच ने इस प्रकरण में सिंगल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सिंगल बेंच द्वारा पारित आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था, क्योंकि विभाग को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर नहीं दिया गया। न्यायालय ने इसे न्यायिक अनुशासन के विपरीत माना और स्पष्ट किया कि सेवा नियमों की अनदेखी कर किसी कर्मचारी को विशेष राहत नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि में रायपुर जिला न्यायालय में असिस्टेंट ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत कर्मचारी अजीत चौबेलाल गोहर का नाम सामने आया। उन्होंने परिवीक्षा अवधि के दौरान एलएलबी की पढ़ाई शुरू की थी। पहले और दूसरे वर्ष के लिए उन्हें विभागीय अनुमति मिल गई थी, लेकिन सत्र 2025-26 में तीसरे वर्ष की नियमित पढ़ाई की अनुमति विभाग ने देने से इनकार कर दिया। विभाग का तर्क था कि नए नियमों के तहत नियमित छात्र के रूप में पढ़ाई की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इसके बाद कर्मचारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में आदेश पारित कर दिया। हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस आदेश को पलटते हुए विभाग के निर्णय को सही ठहराया।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका स्थापना नियम 2023 के नियम 11 का स्पष्ट उल्लेख किया। इस नियम के अनुसार, न्यायिक कर्मचारी सेवा में रहते हुए नियमित उम्मीदवार के रूप में किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते। वे केवल निजी या पत्राचार माध्यम से ही अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ा सकते हैं।

डिवीजन बेंच ने 4 सितंबर 2025 को विभाग द्वारा कर्मचारी की अनुमति निरस्त करने के आदेश को वैध ठहराते हुए कहा कि सरकारी और न्यायिक सेवा में रहते हुए व्यक्तिगत शैक्षणिक प्रगति से पहले प्रशासनिक अनुशासन और कार्यालयीन जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

यह फैसला न केवल न्यायिक कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सेवा नियमों के मामले में अदालत किसी प्रकार की ढील के पक्ष में नहीं है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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