रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)… सरकारी स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य ग्रामीणों को समय पर इलाज और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन रामचंद्रपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर सामने आई शिकायतें इन बुनियादी सुविधाओं पर ही सवाल खड़े कर रही हैं। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. धनंजय कुमार चंद्रा पर ड्यूटी से गायब रहने, आपातकालीन स्थिति में फोन नहीं उठाने, मरीजों से अभद्र व्यवहार करने और सरकारी दवाएं उपलब्ध नहीं कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनपद पंचायत अध्यक्ष को लिखित आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी नियमित रूप से मुख्यालय में उपलब्ध नहीं रहते। मरीज या उनके परिजन किसी समस्या को लेकर सवाल करते हैं तो उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय कथित तौर पर डांट-फटकार का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में फोन करने पर कॉल नहीं उठाने और वापस फोन नहीं करने की शिकायत भी की गई है। ऐसे में रात के समय किसी मरीज की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों के सामने इलाज की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है।

सरकारी दवाएं रहते बाजार से खरीदने का आरोप

शिकायत में दवाओं के वितरण को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मरीजों को दवाओं की पर्ची लिखकर बाहर की दुकानों से दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता है, जबकि शासन की ओर से स्वास्थ्य केंद्र को दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। आरोप यह भी है कि एंटी रेबीज और एंटी स्नेक वेनम जैसी आपातकालीन दवाएं स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध रखने के बजाय चिकित्सक के निवास पर रखी जाती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, रात में जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से संपर्क करने या उनके निवास पर पहुंचने वाले मरीजों के परिजनों को कथित तौर पर डांटकर लौटा दिया जाता है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मरीजों की समुचित जांच और उपचार किए बिना ही उन्हें दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन शिकायत में उठाए गए सवालों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

गर्भवती महिलाओं के पोषण आहार पर सवाल

मामला केवल इलाज और दवाओं तक सीमित नहीं है। गर्भवती महिलाओं को जांच के दौरान दिए जाने वाले पौष्टिक गर्म आहार की व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। मितानिनों के हवाले से शिकायत में कहा गया है कि पहले भी सभी पात्र महिलाओं को आहार नहीं मिल पाता था। कई महिलाओं को सामग्री खत्म होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता था। अब यह सुविधा पूरी तरह बंद होने का आरोप लगाया गया है।

गर्भवती महिलाओं के पोषण से जुड़ी सुविधा का नियमित संचालन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यदि शिकायत के मुताबिक आहार वितरण बंद है, तो इसकी वजह, उपलब्ध बजट और सामग्री की स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कौन करेगा?

रामचंद्रपुर और आसपास की पंचायतों के ग्रामीणों की शिकायत ने स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली के साथ-साथ विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि चिकित्सक की अनुपस्थिति, आपातकालीन सेवाओं में बाधा और दवाओं के वितरण में अनियमितता की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं, तो इन पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या स्वास्थ्य विभाग ने कभी केंद्र का औचक निरीक्षण किया और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जांची?

क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी केवल अस्पताल के प्रभारी तक सीमित नहीं है। विभागीय अधिकारियों की निगरानी और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है। ग्रामीणों ने लिखित शिकायत देकर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी आरोपों की जांच कराते हैं या मामला आवेदन तक ही सीमित रह जाता है।

शिकायत में रामचंद्रपुर, चेरवाडीह, चरगढ़, हरिहरपुर और अनिरुद्धपुर के सरपंचों सहित बजरंगी प्रसाद गुप्ता, अर्जुन सिंह, संता सिंह, गिरवर सिंह, दयाराम, राम सिंह राय, विजय राम, देवकुमार, वासुदेव, रघुनाथ राम, अमरेश कोरवा, अखिलेश सिंह, राजेंद्र गुप्ता, मानदेव राम, श्यामलाल राम, जगु राम, अशोक राम और रामलाल राम सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल हैं।

अब जवाबदेही तय करने की बारी

ग्रामीणों ने शिकायत के माध्यम से कार्रवाई की मांग की है। मामले में संबंधित चिकित्सक का पक्ष, स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया और शिकायत पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्रामीणों को समय पर इलाज, जरूरी दवाएं और गर्भवती महिलाओं को निर्धारित पोषण सुविधा मिल रही है या नहीं। इसका जवाब कागजी दावों से नहीं, स्वास्थ्य केंद्र की वास्तविक स्थिति की जांच से ही मिलेगा।