बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव (TS Baba) ने पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री पद को लेकर चले ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चाओं को पार्टी के लिए नुकसानदेह बताया है। उन्होंने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस तरह की बहस नहीं थी।

कांग्रेस ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और जनता का भरपूर समर्थन हासिल किया। सिंहदेव ने कहा कि पार्टी को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की जरूरत नहीं है। चुनाव के बाद पार्टी उचित व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप सकती है।

शनिवार को बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र पहुंचे सिंहदेव ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से जनता के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि भाषण देकर चले जाने के बजाय लोगों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनना और उनके सुख-दुख को समझना अधिक सार्थक है। जनता के साथ वास्तविक रिश्ता नियमित संवाद और जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहने से बनता है, केवल चुनाव के दौरान लोगों के बीच पहुंचने से नहीं।

सिंहदेव ने कहा कि मंडल और सेक्टर स्तर के पदाधिकारियों को आम लोगों से लगातार मिलना चाहिए और उनके सुख-दुख में भागीदार बनना चाहिए। चुनाव के समय ही सक्रिय होने से जनता के बीच यह संदेश जा सकता है कि नेता अपने राजनीतिक फायदे के लिए लोगों के पास आते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अभी से एकजुट होकर आगामी चुनाव की तैयारी करने का आह्वान किया।

बिल्हा में आयोजित जनसभा के दौरान सिंहदेव ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर ध्यान देने और मतदाता सूची से हटाए गए कांग्रेस सदस्यों के नाम दोबारा जुड़वाने के लिए प्रयास करने को कहा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस काम को गंभीरता से लेने और पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए सक्रिय रहने की अपील की।

सिंहदेव के दौरे की शुरुआत सरगांव बस स्टैंड पर हुए स्वागत से हुई। इसके बाद साहू भवन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बाद में वे बिल्हा मंडी परिसर में आयोजित जनसभा में शामिल हुए और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

जनसभा में सिंहदेव ने आरोप लगाया कि देश में हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच नफरत बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने भगवान राम के नाम पर लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। उनके बयान के दौरान सामाजिक सौहार्द और धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल का विषय चर्चा में रहा।