CG शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला/रायपुर। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया ब्लॉक में वर्ष 1998 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती प्रक्रिया में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में एसीबी/ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के बाद ब्यूरो ने तत्कालीन लोकसेवकों और चयनित अभ्यर्थियों सहित कुल 22 आरोपियों के खिलाफ करीब 1,000 पन्नों का चालान विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, कवर्धा की अदालत में पेश किया है। मामले में भर्ती प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर नियमों की अनदेखी, आरक्षण व्यवस्था में गड़बड़ी और चयन समिति के सदस्यों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं।

ब्यूरो के अनुसार, इस मामले में 25 दिसंबर 1998 को जनपद पंचायत पंडरिया के तत्कालीन अध्यक्ष अर्जुन तिवारी की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में शिक्षाकर्मी भर्ती के दौरान भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध चयन किए जाने के आरोप लगाए गए थे। इसमें साक्षात्कार पंजी में अंकों की काट-छांट, नियमित रूप से कॉलेज में पढ़ाई कर रहे अभ्यर्थियों को अध्यापन अनुभव के अंक देने, आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने और चयन समिति के सदस्यों द्वारा अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने की शिकायत की गई थी। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि मध्यप्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 1997 के अनुसार अभ्यर्थियों की वर्गवार योग्यता सूची तैयार कर निर्धारित संख्या में पात्र उम्मीदवारों को परीक्षा या साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था। लेकिन आरोप है कि साक्षात्कार के लिए तैयार सूची में अर्हता परीक्षा के अंकों के साथ अध्यापन अनुभव के बोनस अंक भी जोड़ दिए गए। इससे अभ्यर्थियों का योग्यताक्रम प्रभावित हुआ। ब्यूरो के मुताबिक, कुछ पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया, जबकि निर्धारित योग्यताक्रम के आधार पर पात्र नहीं होने वाले कुछ अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल किया गया।

जांच में महिला आरक्षण और दिव्यांग कोटे के पदों पर चयन प्रक्रिया को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए। सामान्य महिला वर्ग के 49 रिक्त पदों के लिए 160 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया गया था। इनमें सामान्य वर्ग की 130, अन्य पिछड़ा वर्ग की 26, अनुसूचित जाति की 3 और अनुसूचित जनजाति की एक अभ्यर्थी शामिल थीं। ब्यूरो ने अभिलेखों के परीक्षण के आधार पर कहा कि अंतिम चयन में क्षैतिज आरक्षण और वर्गवार समायोजन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

अनुसूचित जाति के दिव्यांग वर्ग के चार पदों के मामले में भी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार, इस वर्ग में 15 दिव्यांग अभ्यर्थियों के आवेदन संबंधी अभिलेख उपलब्ध होने के बावजूद केवल 10 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। ब्यूरो का कहना है कि निर्धारित नियमों के मुताबिक पात्र अभ्यर्थियों को बुलाने और वर्गवार चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

मामले में चयन समिति के कुछ तत्कालीन सदस्यों पर अपने नजदीकी रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है। जांच में तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी तथा सदस्यों बृजबिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा के रिश्तेदारों के अभ्यर्थी होने की जानकारी सामने आई। इनमें उग्रसेन चंद्रवंशी, नीरा चंद्रवंशी, विनीता वैष्णव, देवेश वैष्णव, स्वर्णा वैष्णव, कौशल्या वैष्णव और शैल तिवारी के नाम शामिल हैं। ब्यूरो के मुताबिक, संबंधित समिति सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार के दौरान उपस्थित रहकर उन्हें अंक दिए और साक्षात्कार से पहले रिश्तेदारी की जानकारी घोषित नहीं की थी।

कुछ अभ्यर्थियों के अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्रों की भी जांच की गई। ब्यूरो के अनुसार, ऐसे अभिलेख मिले जिनसे संबंधित अभ्यर्थियों के अनुभव दर्शाए गए समय में कॉलेजों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत रहने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने की जानकारी सामने आई। इसके बावजूद उन्हें अध्यापन अनुभव के अंक दिए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से भर्ती प्रक्रिया में कथित मिलीभगत और अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर जनपद पंचायत पंडरिया के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एम.एल. भारती और अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण एन.आर. वर्मा, तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और तत्कालीन सदस्य हरिराम घृतलहरे सहित 16 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ चालान पेश किया गया है। आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन के लिए साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।

ब्यूरो ने यह भी बताया कि मामले के अन्य आरोपी तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई और शिक्षा स्थायी समिति के तत्कालीन सदस्य बृजबिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा की मृत्यु हो चुकी है। उनकी मृत्यु से संबंधित जानकारी भी चालान में दर्ज की गई है। अब मामला न्यायालय के समक्ष है, जहां आरोपों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।