जेल में ‘सुधार मॉडल’ लागू: स्वास्थ्य, सुरक्षा और हुनर—तीनों पर डीजी की सख्त लाइन
जेल व्यवस्था पर सख्ती: स्वास्थ्य सुविधा दुरुस्त करो, बंदियों को हुनर से जोड़ो

अंबिकापुर:( पृथ्वी लाल केशरी)..केंद्रीय जेल अंबिकापुर में औचक निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने साफ संकेत दिया—व्यवस्था सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बंदियों के स्वास्थ्य और पुनर्वास पर बराबर जोर रहेगा।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल की बैरक, अस्पताल, उद्योग खंड, पाकशाला और सभा भवन का दौरा किया और हर सेक्शन की स्थिति को बारीकी से परखा। अस्पताल पहुंचते ही उनका फोकस स्पष्ट था—बंदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा हर हाल में मिले। व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए कि इलाज और देखभाल में किसी भी तरह की कमी बर्दाश्त नहीं होगी।
उद्योग खंड में तस्वीर कुछ अलग दिखी। यहां बांस शिल्प, सिलाई और प्रिंटिंग प्रेस की इकाइयों में बंदी काम करते नजर आए। हिमांशु गुप्ता ने इन गतिविधियों की सराहना की और इसे सुधारात्मक व्यवस्था की मजबूत कड़ी बताया। इसी दौरान उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस को अपग्रेड करने के लिए कलर ऑफसेट मशीन उपलब्ध कराने की घोषणा भी की—यह कदम सीधे तौर पर बंदियों के कौशल को बाजार से जोड़ने की दिशा में माना जा रहा है।
जेल के भीतर चल रहे रचनात्मक प्रयासों ने भी ध्यान खींचा। ‘सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट’ में पेंटिंग सीख रहे बंदियों को प्रोत्साहन मिला, वहीं ‘सरगुजा स्कूल ऑफ म्यूजिक’ के तहत बंदियों ने संगीत प्रस्तुति दी, जिसने निरीक्षण को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर एक सकारात्मक माहौल में बदल दिया।
निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी फोकस बना रहा। जेल महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और सुधार—दोनों साथ-साथ चलेंगे। इसके साथ ही कौशल विकास कार्यक्रमों को और विस्तार देने के निर्देश दिए गए, ताकि बंदी सजा के बाद समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।
औचक निरीक्षण ने एक संदेश साफ कर दिया—जेल अब सिर्फ बंदीगृह नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्निर्माण की जगह के रूप में विकसित करने की दिशा में काम तेज किया जा रहा है।





