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कुंभ की मर्यादा तार-तार: शंकराचार्य को रोके जाने की घटना से गरमाया माहौल.. कांग्रेस नेता ने कही यह बात

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने का मामला तूल पकड़ता

प्रयागराज..मौनी अमावस्या जैसे संयम, साधना और आत्मशुद्धि के प्रतीक पर्व पर प्रयागराज के संगम तट से सामने आई एक घटना ने देशभर के सनातन समाज को गहरी पीड़ा में डाल दिया है। धर्माचार्य शंकराचार्य महाराज स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी को कुंभ क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोके जाने और उनके समर्थकों के साथ कथित धक्का-मुक्की के आरोपों ने धार्मिक मर्यादा, प्रशासनिक संवेदनशीलता और संवैधानिक संतुलन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

 पूरे प्रकरण को लेकर सनातन समाज में यह भावना उभरकर सामने आई है कि यह केवल किसी एक संत या समूह से जुड़ी घटना नहीं, बल्कि उस परंपरा और विचारधारा से जुड़ा प्रश्न है, जो सदियों से भारत की आध्यात्मिक पहचान रही है। मौनी अमावस्या जैसे पावन अवसर पर इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होना कई लोगों को असहज कर रहा है।

धार्मिक संगठनों और सनातन विचार से जुड़े व्यक्तियों का कहना है कि कुंभ जैसे आयोजन केवल प्रशासनिक प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत स्वरूप हैं। ऐसे में संतों और धर्माचार्यों के प्रति व्यवहार में अतिरिक्त संवेदनशीलता और सम्मान अपेक्षित होता है। आरोप है कि घटना के दौरान प्रशासनिक बल की भूमिका मर्यादाओं के अनुरूप नहीं रही, जिससे भावनात्मक आघात पहुंचा है।

 विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए महेश दुबे ‘टाटा’  ने कहा कि सनातन परंपरा सहिष्णुता और संयम का मार्ग सिखाती है, लेकिन सहनशीलता का अर्थ यह नहीं कि धार्मिक गरिमा को बार-बार ठेस पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में धर्म, संविधान और प्रशासन—तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि समाज में विश्वास और सौहार्द बना रहे।

महेश दुबे ने यह भी कहा कि इस घटना ने सनातन समाज को आत्ममंथन के लिए विवश किया है। उनका मानना है कि आस्था से जुड़े विषयों में संवाद, संवेदनशीलता और संयम ही समाधान का मार्ग है, न कि टकराव। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में धार्मिक मर्यादाओं का पूरा सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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