रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालयों से भेजी गई जानकारी में कथित गड़बड़ियों के कारण 21,500 से अधिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची अब तक अंतिम नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को संशोधित जानकारी और दावा-आपत्तियां मंगाने के लिए चौथी बार जिलों को निर्देश जारी करने पड़े हैं।

हैरानी की बात यह है कि शिक्षकों की जन्मतिथि, पहली नियुक्ति की तारीख और वरिष्ठता तिथि जैसे बुनियादी रिकॉर्ड में भी अंतर सामने आने की शिकायतें हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि जिन जानकारियों के आधार पर पदोन्नति होनी है, उन्हीं में बार-बार संशोधन के कारण पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है।

2025 में सही रिकॉर्ड, 2026 की सूची में गड़बड़ी का आरोप

शिक्षकों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 की वरिष्ठता सूची में कई शिक्षकों की जन्मतिथि, पहली नियुक्ति और वरिष्ठता तिथि सही दर्ज थी। लेकिन 1 अप्रैल 2026 की प्राविधिक सूची सामने आने के बाद कुछ शिक्षकों के रिकॉर्ड में बदलाव दिखाई दिए। इससे संबंधित शिक्षकों ने बड़ी संख्या में दावा-आपत्तियां दर्ज कराईं।

शिक्षकों का कहना है कि एक साल के भीतर पुराने रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हो गया, इसकी जांच होनी चाहिए। आपत्तियां मिलने के बाद सूची को अंतिम रूप देने के बजाय संशोधन के लिए फिर जिलों को भेज दिया गया। इससे पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ने में बाधा आ रही है।

तारीख-महीने के क्रम में भी गड़बड़ी

वरिष्ठता सूची से जुड़ी एक अन्य समस्या तारीख दर्ज करने के प्रारूप को लेकर सामने आई है। आरोप है कि कुछ जिलों में जन्मतिथि और नियुक्ति तिथि को तारीख-माह-वर्ष के बजाय माह-तारीख-वर्ष के क्रम में दर्ज कर दिया गया। इससे रिकॉर्ड में भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका है।

इसी को देखते हुए DPI को स्पष्ट निर्देश देना पड़ा कि जन्मतिथि, नियुक्ति तिथि और अन्य सभी तारीखें एक समान तारीख-माह-वर्ष के प्रारूप में दर्ज की जाएं। विभाग को हर शिक्षक का रिकॉर्ड क्रमवार और सही तरीके से उपलब्ध कराने को कहा गया है।

टीईटी, मेरिट क्रमांक और पात्रता की जानकारी भी जरूरी

DPI के निर्देशों में केवल जन्मतिथि और नियुक्ति तिथि सुधारने तक सीमित रहने के बजाय पदोन्नति के लिए जरूरी अन्य जानकारियां भी मांगी गई हैं। कक्षा 6 से 8 तक के प्रधानपाठकों के संबंध में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की जानकारी देने को कहा गया है। वहीं, सीधी भर्ती और सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से आए व्याख्याताओं के समग्र मेरिट क्रमांक की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

जिला शिक्षा अधिकारियों को यह प्रमाणित करना होगा कि कोई भी पात्र शिक्षक वरिष्ठता सूची से छूटा नहीं है। जानकारी में गलती या देरी के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।

चौथी बार जानकारी मांगने पर शिक्षक संगठनों में नाराजगी

वरिष्ठता सूची तैयार करने में हो रही देरी को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि DPI के आदेशों में समय-सीमा और कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है, लेकिन जिला स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से समस्या बनी हुई है।

शिक्षकों का कहना है कि 16 अक्टूबर की निर्धारित समय-सीमा के बाद भी यदि सूची जारी नहीं होती है, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उनका तर्क है कि वरिष्ठता सूची में बार-बार सुधार की प्रक्रिया के कारण पात्र शिक्षकों की पदोन्नति अनिश्चितता में फंस गई है।

करीब 1,500 प्राचार्य पद खाली, स्कूलों में प्रभारियों के भरोसे काम

वरिष्ठता सूची में देरी का असर स्कूलों में नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग को मिलाकर प्रदेश में प्राचार्यों के लगभग 2,600 पद हैं, जिनमें करीब 1,500 पद खाली बताए जा रहे हैं।

पिछली पदोन्नति और पदस्थापना के दौरान करीब 1,200 पद भरे गए थे, लेकिन इनमें से कई प्राचार्य एक साल के भीतर सेवानिवृत्त हो गए। ऐसे में अनेक हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का संचालन प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहा है।