स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति के लिए रुद्राभिषेक..वाराणासी के आचार्य कर रहे अखण्ड जाप..पुण्य कमाने पहुँच रहें दिग्गज

बिलासपुर…सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय के मूलमंत्र को साधते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी के निवास स्थान पर बीते तीन दिनों से विशेष धार्मिक अनुष्ठान चल रहा है। वाराणसी से आए आचार्यों की मौजूदगी में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप किया जा रहा है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य शहरवासियों के स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करना है।
विजय केशरवानी ने बताया कि तीर्थयात्रा के अनुभव से उन्हें प्रेरणा मिली कि समाज की भलाई के लिए धार्मिक अनुष्ठान होना चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने अपने निवास में पूजन व अनुष्ठान का संकल्प लिया।
आचार्यों ने समझाया महत्व
अनुष्ठान सम्पन्न करा रहे काशी वाराणसी के आचार्य उदित नारायण मिश्र ने बताया कि रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप भगवान शिव को समर्पित अत्यंत शक्तिशाली पूजन पद्धति है। यह जीवन की कठिनाइयों, बीमारियों और अकाल मृत्यु से रक्षा करता है। शिवलिंग पर दूध, घी, शहद, शक्कर मिश्रित जल और गन्ने का रस जैसे पवित्र तरल पदार्थों से अभिषेक करने पर अलग-अलग लाभ प्राप्त होते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार स्वयं भगवान राम ने भी माता सीता की खोज के लिए लंका प्रस्थान से पूर्व रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर रुद्राभिषेक किया था और विजय प्राप्ति का आशीर्वाद लिया था।
शामिल आचार्यगण
इस धार्मिक अनुष्ठान को सम्पन्न कराने में पंडित उदित नारायण मिश्र, पंडित अनूप मौले, पंडित सुरेंद्र गर्ग, पंडित महामृत्युंजय मिश्र (काशी विश्वनाथ वाराणसी) और पंडित अमित तिवारी (बिलासपुर) अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
रुद्राभिषेक का महत्व
आचार्यों ने बताया कि रुद्र का अर्थ है – दुखों का हरण करने वाभगवा यानी भगवान शिव होता है। अभिषेक का अर्थ जल व अन्य पवित्र तरल पदार्थों से स्नान कराने से है। आचार्यों ने जानकारी दिया कि दूध से अभिषेक करने पर बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की कृपा मिलती है। शहद और घी से अभिषेक करने पर रोग-निवारण और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
महामृत्युंजय जाप का लाभ
आचार्यों ने महामृत्युंजय जाप के महत्त्व प्रकाश डालते हुए कहा कि मंत्र जाप से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। लंबी आयु मिलती है। रोग-बाधाओं और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। धन-धान्य व यश-सम्मान की प्राप्ति होती है।भय, चिंता और नकारात्मक विचार दूर होकर मन शांत होता है।आत्मा शुद्ध होकर साधक आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।





