बलरामपुर-रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)… बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर बैठकों और निर्देशों के बीच शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। राजपुर-कुसमी मुख्य मार्ग पर सेवारी हायर सेकेंडरी स्कूल के पास बॉक्साइट से लदे ट्रक और मजदूरों से भरी पिकअप की आमने-सामने हुई भीषण टक्कर में तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे ने एक बार फिर रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही, तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा इंतजामों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

आधी रात सड़क पर बिखर जिंदगी

बताया जा रहा है कि पिकअप में चालक समेत 11 मजदूर सवार थे। सभी प्रतापपुर क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं और काम के सिलसिले में शंकरगढ़ की ओर जा रहे थे। रात करीब दो बजे सेवारी हायर सेकेंडरी स्कूल के पास पहुंचते ही सामने से आ रहे बॉक्साइट लदे ट्रक से पिकअप की जोरदार भिड़ंत हो गई।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कुछ मजदूर सड़क पर जा गिरे, जबकि कई वाहन के भीतर फंस गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव शुरू किया। हादसे में तीन मजदूरों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

सात घायलों को अंबिकापुर किया रेफर

घटना की सूचना मिलते ही राजपुर थाना प्रभारी भारद्वाज सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने घायलों को राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद सातों घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर रेफर किया गया।

तीनों मृतकों के शव राजपुर अस्पताल में रखे गए हैं। पुलिस के अनुसार मृतकों की पूरी पहचान और पता फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। परिजनों के पहुंचने के बाद पहचान की प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने स्वजन को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

दोनों वाहन जब्त, जांच शुरू

राजपुर पुलिस ने दुर्घटना में शामिल बॉक्साइट लदे ट्रक और पिकअप को जब्त कर लिया है। हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी में तेज रफ्तार को हादसे की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है, लेकिन दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ट्रक चालक की भूमिका, वाहनों की स्थिति और घटनास्थल से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

सवाल हादसे का नहीं, सुरक्षा के अमल का भी

यह हादसा महज एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़ा करता है। जिले में समय-समय पर सड़क सुरक्षा को लेकर बैठकें होती हैं, अधिकारियों को यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए जाते हैं और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की बात कही जाती है। इसके बावजूद यदि रात के समय भारी वाहनों की तेज रफ्तार और मजदूरों से भरे छोटे वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है, तो बैठकों और निर्देशों का असर जमीन पर कितना है, यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है।

स्थानीय स्तर पर सड़क सुरक्षा को लेकर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है। केवल बैठक कर निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित निगरानी और जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।

तीन मौतें फिर छोड़ गईं अनुत्तरित सवाल

एक ही वाहन में रोजी-रोटी की तलाश में निकले मजदूरों के लिए शुक्रवार की रात जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई। तीन परिवारों ने अपनों को खो दिया, जबकि सात परिवार अब अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे अपने परिजनों की चिंता में हैं।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क सुरक्षा को लेकर होने वाली बैठकों का असर आखिर सड़क पर कब दिखाई देगा? यदि तेज रफ्तार और भारी वाहनों की आवाजाही दुर्घटनाओं का कारण बन रही है, तो जिम्मेदार एजेंसियां रोकथाम के लिए कौन से ठोस कदम उठा रही हैं? इस हादसे की जांच इन सवालों का जवाब भी तलाशेगी या मामला सिर्फ जांच और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा—यह देखने वाली बात होगी।