रायपुर( मनीष जायसवाल )स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने शुक्रवार दोपहर एक बजे विभागीय गतिविधियों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को लेकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

इस दौरान मंत्री ने युक्तियुक्तकरण, शिक्षकों की पदोन्नति, नई भर्ती, ऑनलाइन अटेंडेंस, पाठ्यपुस्तक, बहुभाषी शिक्षा, स्कूल भवन, तकनीक आधारित व्यवस्था, परीक्षा परिणाम और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। विभाग की ओर से रखी गई प्रमुख बातें इस प्रकार हैं।

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युक्तियुक्तकरण के तहत 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया है। विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार यह प्रक्रिया की गई। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया।

453 शिक्षक विहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पूर्ति की गई, जबकि 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों की व्यवस्था की गई। विभाग के अनुसार इस प्रक्रिया में अधोसंरचनात्मक विकास, स्कूल कॉम्पलेक्स की अवधारणा को मजबूत करने और शिक्षकों की उपलब्धता पर फोकस किया गया है। इसके साथ ही शैक्षिक प्रशासन में नियंत्रण को भी इसका हिस्सा बताया गया।

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शिक्षकों की पदोन्नति के संबंध में विभाग ने बताया कि 2017-18 के बाद शिक्षकों की पदोन्नति की गई है। टी संवर्ग में 1,335 और ई संवर्ग में 1,478, कुल 2,813 पदों पर प्राचार्यों की पदोन्नति हुई है। टी संवर्ग में कुल 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति की गई।

पिछले दो वर्षों में सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक प्राथमिक शाला, सहायक शिक्षक से शिक्षक और शिक्षक से प्रधान पाठक माध्यमिक शाला के पदों पर लगभग 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं। 2,621 बीएड योग्यताधारी सहायक शिक्षकों को सहायक शिक्षक विज्ञान-प्रयोगशाला के पद पर समायोजित किया गया है। पदस्थापना की कार्रवाई ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से पारदर्शिता के साथ किए जाने की जानकारी दी गई।

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शिक्षक भर्ती के मोर्चे पर दिव्यांग बालक-बालिकाओं के लिए स्पेशल एजुकेटर के 848 पद स्वीकृत किए गए हैं। वर्ष 2025 में स्पेशल एजुकेटर के 62 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति की गई। पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति हुई है। वहीं 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती की परीक्षा प्रक्रिया चल रही है। इसमें सहायक शिक्षक के 2,292, सहायक शिक्षक व्याख्याता के 854, प्रयोगशाला के 200 और शिक्षक के 1,654 पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती की प्रक्रिया भी चल रही है।

कम्प्यूटर आधारित परीक्षा की शुरुआत करते हुए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय और अन्य शासकीय संस्थाओं के शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक संविदा पदों पर भर्ती के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कम्प्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT शुरू की गई है। चयन प्रक्रिया के लिए सक्षम एजेंसी के चयन हेतु संचालक लोक शिक्षण को अधिकृत किया गया।

जेम टेंडर के माध्यम से परीक्षा एजेंसी का चयन कर कार्य आदेश जारी किया जा चुका है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,895 और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,171, कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया चल रही है। विभाग के अनुसार CBT का परिणाम परीक्षा के एक सप्ताह के भीतर घोषित किया जाएगा। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कम समय में परिणाम जारी हो सकेंगे, जिससे संविदा शिक्षकों की नियुक्ति होने पर विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

नए शिक्षा सत्र और समय-सारणी के संबंध में बताया गया कि 2026-27 में सभी शालाओं के संचालन के लिए एक समान शैक्षणिक समय-सारणी तैयार की गई है। प्रदेश के सभी विद्यालयों के लिए क्रीड़ा समय-सारणी और भ्रमण समय-सारणी भी अलग से जारी की गई है। समय-सारणी में शैक्षिक पाठ्यक्रम के साथ खेल एवं योग, नैतिक शिक्षा और संस्कार शिक्षा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अनुरूप आगामी शिक्षा सत्र 2027-28 को 1 अप्रैल 2027 से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है।

पाठ्य पुस्तक लेखन और पाठ्यक्रम में बदलाव के तहत 15 जुलाई 2024 से विद्यालयों में NEP-2020 लागू किए जाने की जानकारी दी गई। कक्षा 1 और 2 के हिंदी विषय में बारहखड़ी को शामिल किया गया है। कक्षा 1 और 2 के लिए 16 स्थानीय भाषाओं तथा 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकों का निर्माण किया गया है।

कक्षा 1, 2, 3 और 6 के सभी विषयों की हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम की NCERT पाठ्यपुस्तकों का अनुकूलन किया गया है। कक्षा 11वीं और 12वीं में NCERT नई दिल्ली द्वारा तैयार पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। राज्य में बहुभाषा शिक्षण पर फोकस किया गया है और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के अनुसार पाठ्यपुस्तक निर्माण किया जा रहा है। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सहायक वाचन पुस्तक का लेखन किया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ के पर्व-त्योहार, स्थानीय बोली, महापुरुषों, दर्शनीय स्थलों, खनिज संपदा और वन संपदा की जानकारी उपलब्ध कराने वाली सामग्री तैयार की गई है।

बहुभाषी शिक्षा के तहत छत्तीसगढ़ को भाषाई चित्रण यानी Language Mapping करने वाला देश का पहला राज्य बताया गया। सत्र 2025-26 में बस्तर संभाग में बच्चे की भाषा का कक्षा में उपयोग विषय पर प्राथमिक शाला के शिक्षकों, पोर्टा केबिन के अनुदेशकों और शिक्षकों को मिलाकर 2,700 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। सत्र 2025-26 से सरगुजा संभाग के सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, जशपुर और कोरिया जिलों की सभी प्राथमिक शालाओं में इसे लागू किया गया है। सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।

जशपुर जिले के कुनकुरी और बगीचा ब्लॉक में 70 से 75 प्रतिशत बच्चों की घर की भाषा सादरी होने की जानकारी दी गई। लगभग इतने ही प्रतिशत शिक्षक सादरी भाषा बोलने और उसमें काम करने में सक्षम हैं। इसी आधार पर बिग बुक, पिक्चर पोस्टर, कविता पोस्टर और कहानी संग्रह जैसी सहायक सामग्री विकसित की गई है। कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी में शिक्षा के माध्यम के अनुसार पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। कक्षा 4 से 12 तक छत्तीसगढ़ी को स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाने के लिए पाठ्यपुस्तक निर्माण का काम भी प्रक्रियाधीन है।

ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और शैक्षणिक अनुशासन मजबूत करना बताया गया। विभागीय कार्यालयों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था है। शिक्षक और कर्मचारी विद्यालय आने तथा जाने की उपस्थिति VSK मोबाइल ऐप में दर्ज कर रहे हैं। विभाग के अनुसार प्रतिदिन VSK ऐप के माध्यम से लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है। विभाग ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी कर्मचारी पर अनावश्यक नियंत्रण स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में नियमित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है।

तकनीक आधारित नवाचारों में iGOT कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता और कार्यक्षमता बढ़ाने की जानकारी दी गई। 1,95,818 शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। अवकाश प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने के लिए अवकाश प्रबंधन पोर्टल शुरू किया गया है। इससे अवकाश के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म होगी और काम पेपरलेस होगा। स्वीकृति देने वाले अधिकारी की जवाबदेही भी तय होगी। ऑनलाइन पोर्टल में अचल संपत्ति विवरण दर्ज करने की व्यवस्था भी की गई है।

निजी विद्यालयों की स्थापना के लिए डी-रेगुलेशन को शिक्षा के विस्तार और शिक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बताया गया। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप शैक्षणिक अवसर बढ़ाने, भूमि की न्यूनतम आवश्यकता, अक्षय निधि और अन्य विनियमनों को सरल करने पर जोर दिया गया है। विभाग के अनुसार इससे गुणवत्तापूर्ण विद्यालयों की संख्या बढ़ेगी और इसका प्रत्यक्ष लाभ बच्चों को मिलेगा।

निःशुल्क पाठ्य पुस्तक योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इससे 45,33,261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। स्कैनिंग के माध्यम से पुस्तकों का वितरण और सत्यापन किया जा रहा है, जिससे पाठ्य पुस्तकों के अपव्यय पर नियंत्रण होगा। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 16 बोलियों में भी पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन किया गया है।

निःशुल्क सरस्वती सायकल योजना के तहत शासकीय और अनुदान प्राप्त विद्यालयों की कक्षा 9वीं में नवप्रवेशी बालिकाओं को सायकल वितरित की जाती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवार की पात्र बालिकाएं इसकी लाभार्थी हैं। शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही पात्र बालिकाओं को सायकल उपलब्ध कराने की पहल की गई है और पात्रता को अधिक व्यापक बनाकर योजना के विस्तार की भी पहल की जा रही है। सत्र 2026-26 में 1,62,827 बालिकाओं को लाभ मिला।

निःशुल्क गणवेश योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही गणवेश उपलब्ध कराने की पहल की गई है। नए आकर्षक रंग के साथ चेक शर्ट, स्लेटी पेंट और ट्यूनिक का वितरण किया जा रहा है। सत्र 2026-26 में 28,63,786 बच्चे लाभान्वित हुए हैं।

परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए शिक्षा मंत्री द्वारा परीक्षा से पहले संभाग स्तर पर सभी शिक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर मार्गदर्शन दिया गया। ब्लू प्रिंट तैयार कर अध्यापन कराया गया और पालक-शिक्षक बैठकों का आयोजन किया गया। बहुप्रतीक्षित कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा का संचालन किया गया। विभाग के अनुसार सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

 

मंत्रोच्चार भारतीय पद्धति को भी विद्यालयी गतिविधियों में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई। विभाग के अनुसार बौद्धिक और मानसिक विकास के लिए मंत्रोच्चार गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विद्यार्थियों को प्राचीन संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने के साथ मंत्रोच्चार के उच्चारण से कंठ संबंधी दोष के निदान और सकारात्मक सोच बढ़ाने का भी उद्देश्य बताया गया। विभाग का कहना है कि इससे विद्यार्थियों में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा।

 

शनिवार बैग रहित दिवस के तहत प्रत्येक शनिवार विद्यार्थियों को तनाव और भय रहित वातावरण में सीखने का अवसर देने की व्यवस्था की गई है। इस दौरान देश और राज्य की स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराया जाता है। खेल, योग और व्यायाम के माध्यम से मानसिक और शारीरिक विकास पर जोर दिया जाता है। महापुरुषों की जयंती, तीज-त्योहार और ऐतिहासिक तिथियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया जाता है। भाषण, निबंध, गीत, कहानी और लोककथाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के सतत विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।

 

स्कूल भवन और अधोसंरचना को लेकर विभाग ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में कुल 504 नवीन विद्यालयों की स्वीकृति दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवन विहीन विद्यालयों के लिए नए विद्यालय भवन का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच 2,583 नए अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई। पिछले तीन वर्षों में विद्यालयों के शौचालय निर्माण और मरम्मत के लिए 52.39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त समग्र शिक्षा मद से पिछले तीन वर्षों में 302 शौचालयों का निर्माण पूरा हुआ है।

 

नारायणपुर जिले के ओरछा और सुकमा जिले के जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी की स्थापना के लिए भवन निर्माण हेतु 5 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक समग्र शिक्षा के तहत 30 प्राथमिक शाला और 11 उच्च प्राथमिक शाला भवन स्वीकृत किए गए हैं। अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 450 अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भवनों के अति आवश्यक कार्यों के लिए 20.61 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

 

स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण और संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन विद्यालयों के संवर्धन पर पीएम श्री विद्यालयों की तर्ज पर जोर दिया जाएगा। प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की योजना है। इन विद्यालयों में कक्षा पहली से बारहवीं तक अध्ययन की व्यवस्था होगी और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर फोकस रहेगा।

 

नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर संभाग के 6 जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शाला स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई। सभी 3,791 ग्रामों में समग्र शिक्षा के मापदंडों के अनुरूप 5,016 प्राथमिक शालाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की जा रही है। बस्तर संभाग में द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। शून्य दर्ज संख्या और माओवादी घटनाओं के कारण बंद हुए 48 विद्यालयों को फिर से खोला गया है। 36 नए विद्यालय खोले गए हैं। 60 पोर्टा केबिन को आवासीय पीएम श्री विद्यालयों में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है।

 

विद्या समीक्षा केंद्र यानी VSK की स्थापना AI आधारित व्यवस्था के रूप में की गई है। इसके माध्यम से शासन की योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं की उपलब्धता, पीएम पोषण, HRMIS, FLN सहित विभिन्न गतिविधियों की निगरानी VSK के माध्यम से की जा रही है। विद्या समीक्षा केंद्र में कॉल सेंटर की स्थापना भी की गई है। शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों और अधिकारियों को 1 लाख से अधिक कॉल कर फीडबैक लिया गया है। पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित ट्रैकिंग की जा रही है। विभाग के अनुसार इस ट्रैकिंग से शासन के लगभग 40 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

 

प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए विद्यालयों के समीप आवासीय छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालय और छात्रावासों में 33,000 से अधिक बच्चों को आवासीय सुविधा मिल रही है। 13 जिलों में विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए 40 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

 

प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान को छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य के लिए महत्वपूर्ण योजना बताया गया। इस अभियान के तहत जनजातीय क्षेत्रों के समग्र और संतुलित विकास पर जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनजातीय अंचलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यालयी अधोसंरचना और छात्रावास सुविधाओं की उपलब्धता पर काम किया जा रहा है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नत अभियान के तहत 13 जिलों में 42 छात्रावासों की स्वीकृति दी गई है।