बिलासपुर ।सांईं आनंदम् के विशाल सभागार में सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी द्वारा लिखित ग्रँथ ‘पंडित सरयू प्रसाद त्रिपाठी मधुकर : व्यक्तित्व एवं अवदान’ का विमोचन सादगीपूर्ण किंतु गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ।इस अवसर पर पं.द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र पर ग्रँथ तैयार करने का निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थावे विद्यापीठ के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.विनय पाठक रहे तथा अध्यक्षता पूर्व न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी ने की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने मधुकर जी के महाकाव्य एवं खंड काव्य पर चर्चा करते हुए कहा “छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा में द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र जी एवं पं.सरयू प्रसाद प्रसाद त्रिपाठी मधुकर जी के बीच अच्छी साहित्यिक जुगलबंदी थी।उनकी साहित्यिक संबंधों एवं सक्रियता के कारण उस समय बिलासपुर का साहित्यिक वातावरण समृद्ध हुआ।उन्होंने आगे कहा हरिवंश राय बच्चन जैसे महान साहित्य कार भी उनके आमंत्रण पर बिलासपुर पधारते थे।

कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी ने पुस्तक के महत्त्वपूर्ण प्रसंगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुस्तक में वर्णित भाई-भाई के प्रेम के एक मार्मिक उदाहरण का उल्लेख किया, जिसमें छोटा भाई अपने बड़े भाई के चरण धोकर उस जल का पान करता है।
पं.द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र के जीवन पर ग्रँथ लिखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया।डॉ.विनय कुमार पाठक जी ने साहित्यकार एवं उपन्यासकार केशव प्रसाद शुक्ल एवं कवयित्री उषा तिवारी को विप्र जी पर ग्रँथ तैयार करने की जिम्मेदारी दी जिसे दोनों ने स्वीकार किया। इस निर्णय को छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत के संरक्षण एवं भावी पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।

स्व.डॉ.सत्यभामा आडिल को  उपस्थित साहित्यकारों एवं गणमान्यजनों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें   श्रद्धांजलि  अर्पित की।कार्यक्रम के अंत में राकेश पाण्डेय ने उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. विवेक तिवारी, डॉ. जी. डी. पटेल, डॉ. सुधाकर बिबे,केशव प्रसाद शुक्ल, बुधराम यादव, श्रीमती मनीषा भट्ट, श्रीमती मीना तिवारी, श्रीमती उषा तिवारी, डॉ. रश्मिलता मिश्र शैलेन्द्र गुप्ता, डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव, दिनेश तिवारी,राजेश सोनार, दिलेश्वर राव जाधव, विनय पाठक सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।